नई तकनीक से बढ़ेगा इथेनॉल उत्पादन

फेरमेंटेशन समय 50% तक घटाने की दिशा में बड़ा कदम, कानपुर की ग्रीनटेक और कोलकाता की एक्सेनोवा टेक्नोलॉजीज के बीच समझौता

कानपुर। देश में इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। तेल आयात पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को वर्तमान 20 प्रतिशत से बढ़ाकर चरणबद्ध तरीके से 30 प्रतिशत तक करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 22%, 25%, 27% और 30% मिश्रण स्तरों के मानक अधिसूचित किए जा चुके हैं। साथ ही फ्लेक्स फ्यूल वाहनों (FFV) के लिए 85 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित E85 ईंधन भी लॉन्च किया गया है।
सरकार की इस नीति से आने वाले समय में इथेनॉल की मांग में तेज वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इथेनॉल उत्पादन इकाइयों को अपनी क्षमता में विस्तार करना होगा, जिसके लिए बड़े पैमाने पर निवेश और तकनीकी सुधार की आवश्यकता पड़ेगी।
राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के पूर्व निदेशक एवं ग्रीनटेक कंसल्टेंट्स के प्रबंध निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने कहा कि इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए केवल नई इकाइयां स्थापित करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मौजूदा संयंत्रों की कार्यक्षमता बढ़ाना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि फेरमेंटेशन प्रक्रिया को अधिक तेज और प्रभावी बनाया जाए तो बिना अधिक अतिरिक्त संसाधनों के भी उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
इसी दिशा में एक अहम पहल के तहत कोलकाता स्थित एक्सेनोवा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और कानपुर की ग्रीनटेक कंसल्टेंट्स के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते का उद्देश्य ऐसी आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना है, जो शर्करा से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया में लगने वाले फेरमेंटेशन समय को लगभग 50 प्रतिशत तक कम कर सके।
एक्सेनोवा टेक्नोलॉजीज के प्रबंध निदेशक मुंशी जिलानी ने बताया कि विकसित की जा रही तकनीक में फर्मेंटरों के डिजाइन में कुछ आवश्यक बदलाव और किण्वन प्रक्रिया को तेज करने वाली विशेष प्रक्रिया तकनीक को अपनाया जाएगा। इससे वर्तमान संयंत्रों की मौजूदा क्षमता का अधिक प्रभावी उपयोग संभव हो सकेगा और बिना बड़े विस्तार के भी अधिक इथेनॉल उत्पादन किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो देश में इथेनॉल उत्पादन लागत कम होगी और उत्पादन की गति भी तेज होगी। इससे सरकार के हरित ऊर्जा अभियान को मजबूती मिलने के साथ-साथ चीनी और कृषि आधारित उद्योगों को भी लाभ पहुंचेगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग से न केवल पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। इससे पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को बड़ी सफलता मिल सकती है।
इथेनॉल उत्पादन क्षेत्र से जुड़े उद्योगपतियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने इस समझौते को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन प्रक्रिया में तकनीकी नवाचार समय की आवश्यकता बन चुका है।

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