तंबाकू से हर साल 80 लाख मौतें, युवाओं को बचाना बड़ी चुनौती

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर चिकित्सकों ने किया जागरूक, भ्रामक प्रचार से सतर्क रहने की अपील

कानपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर शाखा और इंडियन डेंटल एसोसिएशन (आईडीए) कानपुर ने विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर शनिवार को आईएमए कॉन्फ्रेंस हॉल, परेड में संयुक्त पत्रकार वार्ता आयोजित कर तंबाकू सेवन के बढ़ते दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि तंबाकू आज दुनिया भर में करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है और युवाओं को इसकी लत से बचाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
पत्रकार वार्ता को आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, सचिव प्रो. डॉ. शालिनी मोहन, वित्त सचिव डॉ. विशाल सिंह, वैज्ञानिक सचिव डॉ. दीपक श्रीवास्तव, संयुक्त वैज्ञानिक सचिव डॉ. कुश पाठक तथा आईडीए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. जगवीर सिंह सलूजा, सचिव डॉ. सौरभ सिंह, कोषाध्यक्ष डॉ. अमित मिश्रा एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने संबोधित किया।
चिकित्सकों ने बताया कि वर्ष 2026 की विश्व तंबाकू निषेध दिवस की थीम “आकर्षण का पर्दाफाश : निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला” है। इसका उद्देश्य युवाओं और आमजन को तंबाकू कंपनियों द्वारा किए जा रहे भ्रामक प्रचार, आकर्षक पैकेजिंग और फ्लेवरयुक्त उत्पादों के खतरे से अवगत कराना है।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में दुनिया में लगभग 1.3 अरब लोग तंबाकू का सेवन करते हैं और हर वर्ष करीब 80 लाख लोगों की मौत तंबाकूजनित बीमारियों के कारण होती है। इनमें लगभग 13 लाख मौतें सेकेंड हैंड स्मोकिंग से होती हैं। तंबाकू से होने वाली मौतों की संख्या एचआईवी, ड्रग्स, शराब, सड़क दुर्घटनाओं और गोलीबारी से होने वाली संयुक्त मौतों से भी अधिक है।
विशेषज्ञों ने बताया कि धूम्रपान 90 प्रतिशत फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण है, जबकि सीओपीडी से होने वाली 80 प्रतिशत मौतों के लिए भी धूम्रपान जिम्मेदार है। इसके अलावा धूम्रपान करने वालों में हृदयाघात और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा दो से चार गुना तक बढ़ जाता है। नियमित रूप से सिगरेट पीने वालों में हृदय संबंधी रोग कम उम्र में ही विकसित होने लगते हैं।
चिकित्सकों ने कहा कि गुटखा, पान मसाला, तंबाकू और धूम्रपान के कारण मुख एवं गले के कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। इसलिए समाज के हर वर्ग को तंबाकू के खिलाफ जागरूकता अभियान में भागीदारी करनी चाहिए।
आईएमए और आईडीए के पदाधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे स्वयं तंबाकू सेवन से दूर रहें तथा अपने परिवार और समाज को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें, ताकि स्वस्थ, जागरूक और तंबाकू मुक्त समाज का निर्माण किया जा सके।

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