बिकरू नरसंहार में आर्थिक मदद और हथियार उपलब्ध कराने का था आरोप, माती जेल से कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आया बाहर
कानपुर देहात-उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित और सनसनीखेज बिकरू कांड में नामजद आरोपी तथा कुख्यात अपराधी विकास दुबे के बेहद करीबी माने जाने वाले जयकांत बाजपेयी उर्फ जय बाजपेयी को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। करीब पांच साल तक जेल में बंद रहने के बाद अब उसे जमानत मिल गई है। जमानत की सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद जय बाजपेयी को कानपुर देहात की माती जिला जेल से रिहा कर दिया गया।
जय बाजपेयी लंबे समय से जेल में बंद था और उस पर बिकरू कांड के आरोपियों को आर्थिक सहायता पहुंचाने, अवैध हथियार उपलब्ध कराने और गैंग की गतिविधियों में सक्रिय सहयोग देने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। जांच एजेंसियों और पुलिस रिकॉर्ड में उसे विकास दुबे का ‘खजांची’ बताया गया था। माना जाता था कि वह विकास दुबे के आर्थिक नेटवर्क को संभालता था और उसके काले धन को रियल एस्टेट समेत अन्य कारोबारों में निवेश कराने का काम करता था।
माती जिला जेल के अधीक्षक धीरज कुमार सिन्हा ने जानकारी देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद स्थानीय अदालत से रिलीज ऑर्डर प्राप्त हुआ था। इसके बाद जेल प्रशासन ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर जय बाजपेयी को रिहा कर दिया। जेल के बाहर उसकी रिहाई को लेकर सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम किए गए थे।
गौरतलब है कि 2 और 3 जुलाई 2020 की रात कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में दबिश देने गई पुलिस टीम पर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने घात लगाकर हमला कर दिया था। इस दौरान हुई अंधाधुंध फायरिंग में एक क्षेत्राधिकारी सहित 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़े स्तर पर अभियान चलाकर विकास दुबे गैंग के सदस्यों पर कार्रवाई की थी।
जांच के दौरान जय बाजपेयी का नाम भी सामने आया था। पुलिस का आरोप था कि उसने वारदात में शामिल अपराधियों को आर्थिक मदद पहुंचाई थी और भागने के लिए वाहन तथा हथियार उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई थी। इसी आधार पर उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए थे।
बिकरू कांड के बाद यूपी पुलिस ने विकास दुबे गैंग के आर्थिक नेटवर्क की भी जांच शुरू की थी। जांच एजेंसियों के अनुसार जय बाजपेयी उस नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी था। पुलिस ने उसके खिलाफ अवैध संपत्तियों और आर्थिक लेनदेन से जुड़े कई पहलुओं की भी जांच की थी।
घटना के कुछ दिनों बाद उज्जैन से कानपुर लाए जा रहे विकास दुबे की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी। इसके बाद उसके गैंग से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, जिनमें जय बाजपेयी भी शामिल था। तब से वह जेल में बंद था और लगातार अदालतों में जमानत की कोशिश कर रहा था।
अब सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद उसकी रिहाई हो गई है। हालांकि स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। सूत्रों के मुताबिक जय बाजपेयी की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है, क्योंकि वह उत्तर प्रदेश के सबसे हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों में शामिल प्रमुख आरोपियों में गिना जाता रहा है।