जर्मन शेफर्ड को दोबारा घर लाने पर उठे सवाल, नगर निगम टीम को नहीं मिला प्रवेश
कानपुर के पॉश इलाके विकास नगर में एक पालतू कुत्ता ‘रॉबर्ट’ दहशत का पर्याय बन चुका है। यह वही जर्मन शेफर्ड है जिसने पिछले वर्ष घर की 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला की जान ले ली थी। अब एक बार फिर इसी कुत्ते ने घर की बहू पर जानलेवा हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया है। लगातार दो घटनाओं के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल है और परिवार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, शनिवार रात विकास नगर स्थित घर में पालतू कुत्ता अचानक आक्रामक हो गया और घर की बहू किरण त्रिवेदी पर हमला कर दिया। हमला इतना भयावह था कि कुत्ते ने उनके दोनों हाथों और शरीर के कई हिस्सों को बुरी तरह नोच डाला। परिजन उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका इलाज जारी है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इसी कुत्ते ने पिछले साल मोहिनी त्रिवेदी (90 वर्ष) पर हमला कर दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। उस घटना के बाद नगर निगम ने कुत्ते को अपने कब्जे में ले लिया था, लेकिन परिवार द्वारा दिए गए हलफनामे—जिसमें यह आश्वासन दिया गया था कि कुत्ता दोबारा किसी पर हमला नहीं करेगा—के आधार पर उसे वापस सौंप दिया गया।
अब दोबारा हुई इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब कुत्ता पहले ही एक जान ले चुका था, तो उसे रिहायशी इलाके में रखने की अनुमति कैसे दी गई? और परिवार ने संभावित खतरे के बावजूद उसे वापस घर क्यों लाया?
घटना की सूचना मिलने पर मंगलवार को नगर निगम की टीम कुत्ते को जब्त करने के लिए मौके पर पहुंची, लेकिन टीम को घर में प्रवेश नहीं मिल सका। आरोप है कि परिवार ने दरवाजा नहीं खोला और कुत्ते को घर के भीतर कहीं छिपा दिया, जिससे कार्रवाई नहीं हो सकी।
इस घटना के बाद आसपास के लोगों में दहशत का माहौल है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि यह कुत्ता बाहर निकल गया तो राह चलते लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि कुत्ते को जल्द कब्जे में लेकर उचित कार्रवाई की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने पर मालिकों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, पूरे मामले ने प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब मिलना बाकी है।