कानपुर—शहर में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बिजली बिलों में हो रही कथित अनियमित बढ़ोतरी को लेकर विरोध तेज हो गया है। इसी क्रम में अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के प्रतिनिधिमंडल ने केस्को के निदेशक को ज्ञापन सौंपकर उपभोक्ताओं की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
ज्ञापन में समिति ने आरोप लगाया कि निजी कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं की सहमति के बिना डराकर और दबाव बनाकर स्मार्ट मीटर लगाए गए, जो पूरी तरह अनुचित और गैरकानूनी है। समिति का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद अचानक बिजली बिलों में भारी वृद्धि देखी गई है, जबकि उपभोक्ताओं के घरों में बिजली की खपत या उपकरणों में कोई विशेष वृद्धि नहीं हुई है।
महिला समिति ने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि बढ़ते बिजली बिलों का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों, खासकर महिलाओं पर पड़ रहा है। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे परिवारों के लिए बढ़े हुए बिजली बिल चुकाना कठिन हो गया है, और भुगतान न कर पाने की स्थिति में बिजली कनेक्शन काटे जाने का खतरा और भी चिंता का विषय बन गया है।
समिति ने यह भी कहा कि हाल ही में उपभोक्ताओं के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन द्वारा बिजली काटने की प्रक्रिया में कुछ समय सीमा तय की गई है और अस्थायी रूप से स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक भी लगाई गई है, लेकिन जिन उपभोक्ताओं के यहां पहले से स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं या जिन्होंने बढ़े हुए बिल जमा कर दिए हैं, उन्हें अब तक कोई राहत नहीं दी गई है।
ज्ञापन में यह मांग रखी गई कि जिन घरों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, उन्हें तत्काल हटाकर पारंपरिक इलेक्ट्रिकल मीटर लगाए जाएं। साथ ही बढ़े हुए बिलों के रूप में उपभोक्ताओं से वसूली गई अतिरिक्त राशि को ब्याज सहित वापस किया जाए।
समिति ने बिजली को एक मूलभूत सामाजिक आवश्यकता बताते हुए कहा कि इस पर मुनाफाखोरी जनविरोधी कदम है। साथ ही प्रदेश सरकार से अपने वादे को पूरा करते हुए घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की मांग भी दोहराई गई।
स्मार्ट मीटर बिल बढ़ोतरी पर महिला समिति का विरोध