कानपुर-समय का क्रूर प्रहार और मानवीय संवेदनाओं की गहराई को दर्शाती एक भावुक कर देने वाली घटना शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है शास्त्री नगर काली मठिया चौराहे के पास पिछले करीब 40 वर्षों से लावारिस जीवन बिता रहे जनपद मऊ निवासी चतुरी गुप्ता उर्फ ‘काका हलवाई’ को आखिरकार उनका परिवार मिल गया इस मिलन के पीछे नारायणा अस्पताल के प्रबंधकों और समाजसेवी मुन्ना सिंह चौहान के अथक प्रयासों की बड़ी भूमिका रही पिछले वर्ष भीषण गर्मी में चतुरी गुप्ता सड़क पर बीमार अवस्था में मिले थे समाजसेवी मुन्ना सिंह चौहान ने उन्हें नारायणा मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया, जहां सेक्रेटरी अमित नारायण त्रिवेदी और एमडी उदित नारायण त्रिवेदी के सहयोग से उन्हें 22 दिन आईसीयू में रखकर नया जीवन दिया गया इस वर्ष पुनः स्वास्थ्य बिगड़ने पर जब सरकारी अस्पतालों ने हाथ खड़े कर दिए, तब एक बार फिर नारायणा अस्पताल के प्रबंधन ने देवदूत बनकर उनका इलाज शुरू किया मुन्ना सिंह चौहान ने बताया कि पिछली बार परिजनों को खोजने के लिए चतुरी गुप्ता की मृत्यु तक की अफवाह फैलाई गई थी, ताकि कोई वारिस सामने आए, लेकिन तब कोई नहीं आया इस बार भी निरंतर प्रयासों और गांव-घर के संपर्कों के माध्यम से उनके बेटों को खोजने की जद्दोजहद जारी रही, दो दिन पूर्व चतुरी गुप्ता के मझले बेटे का फोन आया और रविवार सुबह उनके बड़े और मझले दोनों पुत्र अस्पताल पहुंचे 40 साल का अंतराल इतना लंबा था कि आईसीयू में जब पिता-पुत्र आमने-सामने आए, तो दोनों एक-दूसरे को पहचान नहीं सके व्हाट्सएप पर भेजी गई तस्वीरों के जरिए घर पर मां और बड़ी बहन ने शिनाख्त की, तब जाकर बेटों को यकीन हुआ कि यही उनके पिता हैं अस्पताल के वार्ड में यह दृश्य देख हर किसी की आंखें नम हो गईं आर्थिक तंगी के कारण बेटों के पास एम्बुलेंस के 11,000 रुपये जुटाना मुश्किल हो रहा था ऐसे में चाचा ओम प्रकाश गुप्ता (ओपी कैटरर्स) के आर्थिक सहयोग से एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई वहीं, ‘देवदूत वानर सेना’ के संरक्षक अजीत प्रताप सिंह ने मऊ के अस्पतालों में उनके आगे के इलाज का आश्वासन दिया है समाजसेवी मुन्ना सिंह ने परिजनों के लिए नए कपड़ों का प्रबंध कर उन्हें ससम्मान मऊ के लिए विदा किया
40 साल बाद मिला बिछड़ा पिता, अस्पताल बना मिलन का गवाह