कानपुर में नागरिकों ने निकाला विशाल मौन मार्च, अहिंसा और भाईचारे का दिया संदेश
कानपुर में दुनिया भर में बढ़ते युद्ध के उन्माद और हिंसा के खिलाफ सड़कों पर शांति की गूंज सुनाई दी। ‘विश्व युद्धविराम’ के अंतिम दिन कानपुर नागरिक मंच के बैनर तले शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने एक विशाल मौन जुलूस निकालकर वैश्विक शांति और भाईचारे का संदेश दिया।
जुलूस का शुभारंभ बड़ा चौराहा स्थित राम आसरे पार्क से हुआ, जहां से सैकड़ों नागरिक हाथों में शांति संदेश लिखी तख्तियां लेकर मौन धारण कर आगे बढ़े। यह जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरता हुआ फूलबाग स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर जाकर समाप्त हुआ।
जुलूस के दौरान ‘बस करो तेल का खेल’, ‘जंग से सारा विश्व तंग’ और ‘हमें चाहिए प्रेम और भाईचारा’ जैसे नारों के माध्यम से प्रतिभागियों ने युद्ध के दुष्प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित किया। फूलबाग में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि युद्ध न केवल मानव जीवन की हानि का कारण बनता है, बल्कि महंगाई और आर्थिक संकट को भी बढ़ाता है, जिससे आम जनता बुरी तरह प्रभावित होती है।
सभा का संचालन गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष दीपक मालवीय ने किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत की सबसे अधिक आवश्यकता है और किसी भी समस्या का स्थायी समाधान युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति से ही संभव है।
मौन जुलूस के माध्यम से नागरिकों ने संयुक्त राष्ट्र संघ से भी वैश्विक संघर्षों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की। वक्ताओं ने कहा कि युद्ध का सबसे अधिक दुष्प्रभाव निर्दोष महिलाओं, बच्चों और आम नागरिकों पर पड़ता है।
कानपुर नागरिक मंच के संयोजक छोटे भाई नरोन्हा ने कहा कि युद्ध में किसी की जीत नहीं होती, बल्कि मानवता की हार होती है। उन्होंने सभी शक्तिशाली देशों से मिलकर शांति स्थापित करने की अपील की।
इस अवसर पर पैंथर धनीराम, हरविंदर सिंह लॉर्ड, सुरेश गुप्ता, शरद अग्रवाल, नौशाद आलम मंसूरी सहित 100 से अधिक प्रबुद्ध नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
मौन जुलूस से गूंजी शांति की पुकार