कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश करते हुए थाना रावतपुर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। लंबे समय से चर्चा में चल रहे इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड रोहित तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वह काफी समय से पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहा था।
👉 12वीं पास, लेकिन बन बैठा ‘मुन्नाभाई डॉक्टर’
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि बिलग्राम (हरदोई) का रहने वाला रोहित तिवारी महज 12वीं पास है, लेकिन उसने खुद को डॉक्टर बताकर एक पूरा अवैध नेटवर्क खड़ा कर लिया। वह मरीजों और उनके परिजनों को झांसा देकर किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर मोटी रकम वसूलता था।
रोहित सिर्फ बिचौलिया नहीं, बल्कि इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड था। वह डोनर (अंग देने वाले), रिसीपिएंट (अंग लेने वाले) और निजी अस्पतालों के बीच एक संगठित नेटवर्क संचालित करता था।
👉 30 से ज्यादा अवैध ट्रांसप्लांट का कबूलनामा
पूछताछ में आरोपी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि वह अब तक 30 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुका है। यह ऑपरेशन कानपुर के अलग-अलग निजी अस्पतालों में गुपचुप तरीके से कराए जाते थे।
👉 मेरठ कनेक्शन ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
जांच के दौरान मेरठ कनेक्शन भी सामने आया है। रोहित ने बताया कि वह मेरठ की एक टीम के संपर्क में था, जिसमें रोहित मुदगल, डॉक्टर अली और अफजल शामिल हैं। यह टीम समय-समय पर कानपुर आती थी और यहीं अवैध ऑपरेशन को अंजाम देती थी।
👉 कानपुर में फैला था पूरा नेटवर्क
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कानपुर में इस काले कारोबार को फैलाने में शिवम अग्रवाल नामक व्यक्ति रोहित का मुख्य सहयोगी था। दोनों मिलकर मरीजों को फंसाते और फिर अवैध ट्रांसप्लांट की पूरी सेटिंग करते थे।
👉 मोबाइल गायब, कई राज दफन
फिलहाल पुलिस को आरोपी का मोबाइल फोन बरामद नहीं हुआ है, जिसे इस पूरे नेटवर्क की कड़ी जोड़ने में बेहद अहम माना जा रहा है। आशंका है कि मोबाइल में कई बड़े नाम और अस्पतालों के लिंक छिपे हो सकते हैं।
👉 पुलिस का बयान
पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) एस.एम. कासिम आबिदी ने बताया कि रावतपुर पुलिस ने किडनी तस्करी के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी 25 हजार का इनामी था और फर्जी डॉक्टर बनकर 30 से ज्यादा अवैध ऑपरेशन करवा चुका है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर दी गई हैं।
👉 स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने एक बार फिर शहर के निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर बिना प्रशासनिक मिलीभगत या लापरवाही के इतने बड़े स्तर पर अवैध ट्रांसप्लांट कैसे होते रहे?
क्या स्वास्थ्य विभाग अब सख्त कार्रवाई करेगा या पहले की तरह कुछ दिनों बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा—यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
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