कानपुर। रामादेवी क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी के दौरान कैलाश मेडिकल सेंटर के ICU को सील किए जाने के बाद अब पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी की संयुक्त टीम द्वारा की गई इस कार्रवाई को लेकर लोगों में चर्चा है कि क्या यह सिर्फ औपचारिकता भर है या वास्तव में सख्ती।
निरीक्षण के दौरान जहां एक ओर कैलाश मेडिकल सेंटर में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं और ICU को सील कर दिया गया, वहीं अन्य अस्पतालों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब पहले से शिकायतें सामने आ रही थीं, तब स्वास्थ्य विभाग क्या कर रहा था।
स्थानीय लोगों और पीड़ित पक्ष का आरोप है कि यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती, तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते। अब जब मामला सुर्खियों में आया और विवाद गहराया, तब स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कर रही है, जिसे कई लोग “खानापूर्ति” के रूप में देख रहे हैं।
लोगों का कहना है कि सिर्फ ICU सील कर देने से जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती, बल्कि यह भी जरूरी है कि पहले की गई शिकायतों, जांच की पारदर्शिता और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच हो।इस पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अब देखना होगा कि विभाग इन सवालों का जवाब किस तरह देता है और आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
ICU सील के बाद उठे बड़े सवाल: पहले क्यों सोता रहा स्वास्थ्य विभाग