मिडिल ईस्ट तनाव से कानपुर बेकरी उद्योग पर संकट

कानपुर। मिडिल ईस्ट में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब औद्योगिक नगरी कानपुर के बेकरी उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिगड़ते हालातों ने गैस आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसके चलते शहर का प्रमुख बेकरी उद्योग संकट में आ गया है।
उद्योग से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, गैस की भारी किल्लत के कारण कानपुर की लगभग 1250 छोटी-बड़ी बेकरी इकाइयां बंद हो चुकी हैं। इन इकाइयों में रस्क (टोस्ट), बिस्कुट और अन्य बेकरी उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता था, जो अब लगभग ठप हो गया है।
बेकरी उद्योग में ओवन चलाने के लिए कमर्शियल एलपीजी (LPG) का व्यापक उपयोग होता है, जो अब पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रही है। गैस की कमी के चलते फैक्ट्रियों के ओवन ठंडे पड़ गए हैं, जिससे उत्पादन लगभग शून्य हो गया है और बाजार में बेकरी उत्पादों की कमी महसूस की जाने लगी है।
इस संकट का असर केवल बेकरी उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है। बेकरी उत्पादों में उपयोग होने वाला मैदा, जो इस उद्योग का मुख्य कच्चा माल है, उसकी मांग आधी रह गई है। इसके चलते शहर की फ्लोर मिलों का उत्पादन घटकर करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे मिल संचालकों के सामने भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों और संबंधित वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने लागत को और बढ़ा दिया है। पहले 15 रुपये में मिलने वाली बोरी की कीमत बढ़कर 25 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली पॉलीथिन के दामों में भी भारी उछाल आया है। इन बढ़ती लागतों ने छोटे और मध्यम उद्यमियों के लिए कारोबार जारी रखना बेहद कठिन बना दिया है।
इस पूरे संकट का सबसे ज्यादा असर मजदूरों और कारीगरों पर पड़ा है। करीब 1250 फैक्ट्रियों के बंद होने से हजारों दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है और आर्थिक असुरक्षा बढ़ती जा रही है।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो न केवल बेकरी उत्पादों की कीमतों में भारी वृद्धि होगी, बल्कि बेरोजगारी की समस्या भी और गंभीर रूप ले सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति वैश्विक घटनाओं के स्थानीय उद्योगों पर पड़ने वाले प्रभाव का स्पष्ट उदाहरण है, जहां दूर बैठे युद्ध का असर सीधे आम जनता और छोटे कारोबारियों की आजीविका पर पड़ रहा है।

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