कानपुर में ‘किडनी कांड’ का अब तक का सबसे बड़ा खुलासा: अस्पतालों की आड़ में गरीबों की जिंदगी से खेल, डॉक्टरों का संगठित गिरोह बेनकाब, 6 गिरफ्तार—4 फरार
कानपुर नगर सनसनीखेज खुलासा
कमिश्नरेट कानपुर नगर में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी और चौंकाने वाली सफलता हाथ लगी है। पुलिस आयुक्त महोदय के निर्देशन, पुलिस उपायुक्त पश्चिम, अपर पुलिस उपायुक्त पश्चिम एवं सहायक पुलिस आयुक्त कल्याणपुर के कुशल नेतृत्व में थाना रावतपुर पुलिस, सर्विलांस टीम एवं CMO की संयुक्त कार्रवाई में शहर में चल रहे एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश किया गया है। इस खुलासे ने न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार कर दिया है।
पूरे मामले की शुरुआत मुखबिर खास से मिली उस गोपनीय सूचना से हुई, जिसमें बताया गया कि शहर के कुछ निजी अस्पतालों में गरीब और मजबूर लोगों को झांसे में लेकर उनकी किडनी निकालकर उन्हें ऊंची कीमत पर बेचा जा रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया।
👉तीन अस्पतालों पर एक साथ छापेमारी, मचा हड़कंप
देर रात संयुक्त टीम द्वारा कल्याणपुर और रावतपुर क्षेत्र स्थित अहूजा अस्पताल, प्रिया अस्पताल और मिड लाइफ अस्पताल पर एक साथ दबिश दी गई। अचानक हुई इस छापेमारी से अस्पतालों में अफरा-तफरी मच गई। टीम ने मौके पर मौजूद संदिग्ध गतिविधियों की जांच करते हुए कुल 06 व्यक्तियों को हिरासत में लिया, जिनमें डॉक्टर और अस्पताल से जुड़े लोग शामिल हैं।
👉गिरफ्तार आरोपी—चौंकाने वाले नाम सामने
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में
डॉ. सुरजीत सिंह अहूजा (54 वर्ष),
डॉ. प्रीति अहूजा (50 वर्ष),
डॉ. राजेश कुमार (44 वर्ष),
डॉ. राम प्रकाश (40 वर्ष),
डॉ. नरेन्द्र सिंह (35 वर्ष)
और शिवम अग्रवाल (32 वर्ष, एम्बुलेंस संचालक/तथाकथित डॉक्टर)
शामिल हैं।
इन सभी को अलग-अलग अस्पतालों से हिरासत में लिया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई छोटा नेटवर्क नहीं बल्कि एक संगठित और सुनियोजित गिरोह है।
बरामदगी ने खोले कई राज
छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में संदिग्ध दवाइयाँ बरामद की गईं, जिनका इस्तेमाल संभवतः अवैध ट्रांसप्लांट में किया जा रहा था। इसके साथ ही करीब 1 लाख 75 हजार रुपये नकद भी बरामद हुए हैं। पुलिस अब इन दवाइयों और पैसों के स्रोत की भी गहन जांच कर रही है।
40 से 50 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट की आशंका, नेटवर्क बेहद गहरा
प्रारंभिक जांच में बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इन अस्पतालों के माध्यम से अब तक लगभग 40 से 50 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की आशंका है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि यह रैकेट लंबे समय से सक्रिय था और इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की तह तक जाने के लिए हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।
4 अन्य डॉक्टर फरार, लगातार दी जा रही दबिश
इस मामले में अभी भी चार अन्य डॉक्टर फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज, न्यायालय में पेशी
बरामदगी और गिरफ्तारी के आधार पर थाना रावतपुर में मु0अ0सं0 121/26 के तहत मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 की धारा 18/19/20 एवं BNS की धारा 143/3(5) में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। सभी गिरफ्तार आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है और आगे की विधिक कार्यवाही प्रचलित है।
इंसानियत को शर्मसार करने वाला काला कारोबार
यह पूरा मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग—गरीब और मजबूर लोगों—के शोषण की भयावह कहानी है। इलाज के नाम पर लोगों के अंगों का सौदा करना स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
आगे और बड़े खुलासे संभव
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम इस मामले में हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े और भी बड़े नाम और अस्पताल सामने आ सकते हैं।
कानपुर का अब तक का सबसे बड़ा मेडिकल स्कैम बन सकता है यह मामला—पूरे प्रदेश की नजरें टिकीं!