कानपुर में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट: डेंगू-मलेरिया रोकथाम को लेकर बड़ी तैयारी

कानपुर। जनपद में Dengue Fever, Malaria और Chikungunya जैसे वेक्टर जनित रोगों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में रविवार को एक महत्वपूर्ण सेंसिटाइजेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला PATH-सीएचआरआई (PATH-CHRI) के सहयोग से होटल मनोज इंटरनेशनल में आयोजित हुई, जिसका वित्तीय पोषण जी.सी.पी.एल. द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमि ने दीप प्रज्वलन कर किया।
कार्यशाला में जनपद के विभिन्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम ट्रीटमेंट गाइडलाइन्स की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान रोगों की समय पर पहचान, प्रभावी उपचार और रोकथाम के उपायों पर विशेष जोर दिया गया।
सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमि ने अपने संबोधन में कहा कि फील्ड स्तर पर सीएचओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि समय रहते रोगों की पहचान कर ली जाए, तो मृत्यु दर को लगभग शून्य तक लाया जा सकता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में सीखी गई बातों को जमीनी स्तर पर लागू करने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण सत्र का संचालन PATH के रीजनल कोऑर्डिनेटर डॉ. शिवकांत ने किया। उन्होंने जटिल तकनीकी विषयों को सरल और संवादात्मक शैली में समझाते हुए प्रतिभागियों को व्यवहारिक ज्ञान प्रदान किया।
कार्यशाला में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया—
डेंगू और मलेरिया की शुरुआती पहचान एवं केस मैनेजमेंट
लार्वा नियंत्रण और स्रोत निवारण की रणनीतियां
शहरी क्षेत्रों में प्रभावी सर्विलांस और रिपोर्टिंग सिस्टम
जनजागरूकता के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना
इस अवसर पर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (वेक्टर बॉर्न डिजीज), जिला मलेरिया अधिकारी, एनएचएम शहरी के नोडल अधिकारी, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा मलेरिया निरीक्षक सहित कई स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे।
जिला मलेरिया अधिकारी ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इस प्रशिक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए बताया कि अद्यतन प्रोटोकॉल का पालन कर इन बीमारियों के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में एक इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सीएचओ ने फील्ड में आने वाली चुनौतियों और तकनीकी समस्याओं को विशेषज्ञों के समक्ष रखा। विशेषज्ञों ने मौके पर ही उनके समाधान प्रदान किए।
अधिकारियों ने आशा व्यक्त की कि इस प्रशिक्षण से मिले ज्ञान का उपयोग कर स्वास्थ्य कर्मी अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावी कार्य करेंगे और कानपुर को वेक्टर जनित रोगों से मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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