कानपुर। हृदय रोग संस्थान (LPS कार्डियोलॉजी) के डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल और दुर्लभ सर्जरी कर 12 वर्षीय बच्ची को नया जीवन दिया। फतेहपुर के खंडदेवर निवासी लक्ष्मी पटेल के दिल के दाहिने हिस्से (राइट एट्रियम) में टीबी की एक विशाल गांठ बन गई थी, जिसने रक्त प्रवाह को लगभग अवरुद्ध कर दिया था और उसकी स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी।
बच्ची को 24 फरवरी को संस्थान के सीवीटीएस विभाग में भर्ती कराया गया था। हालत नाजुक होने के चलते चिकित्सकों ने 14 मार्च को सर्जरी करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की टीम ने बच्ची को हार्ट-लंग मशीन पर रखकर करीब 4 घंटे तक दिल की धड़कन रोककर सर्जरी की, जो चिकित्सा विज्ञान में अत्यंत जटिल प्रक्रिया मानी जाती है।
सर्जरी के दौरान सबसे पहले दिल के ऊपर जमी मोटी और सख्त झिल्ली को बड़ी धमनियों से अलग किया गया। इसके बाद दिल की दीवार को सावधानीपूर्वक खोलकर अंदर बनी विशाल गांठ को बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के बाद जब गांठ की बायोप्सी कराई गई, तो पता चला कि यह ट्यूमर नहीं बल्कि टीबी संक्रमण के कारण बनी गांठ थी।
संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश वर्मा ने दावा किया कि इस प्रकार का यह दुनिया का पहला मामला है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशन के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि समय पर सही निर्णय और टीम वर्क की बदौलत बच्ची की जान बचाई जा सकी।
इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली टीम में सर्जिकल विभाग से प्रो. राकेश वर्मा, डॉ. सौरभ, डॉ. प्रभात, डॉ. श्रीराज और डॉ. लक्ष्मण शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. चांदनी, डॉ. सूरज, डॉ. उर्वशी, डॉ. निशा और डॉ. दीक्षा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं हार्ट-लंग मशीन का संचालन डॉ. मुबीन ने किया और नर्सिंग स्टाफ में सुनीता, वैशाली व अनुज ने सहयोग दिया।
डॉक्टरों की इस उपलब्धि को चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिसने एक बार फिर जटिल सर्जरी में भारतीय चिकित्सकों की दक्षता को साबित किया है।
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