कानपुर। औद्योगिक नगरी कानपुर की पहचान को एक और झटका लगने की चर्चा तेज हो गई है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार शहर के महत्वपूर्ण विभागों में शामिल श्रमायुक्त कार्यालय को लखनऊ स्थानांतरित करने की तैयारी चल रही है। बताया जा रहा है कि मुख्यालय को गोमती नगर स्थित नए भवन में शिफ्ट करने का प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है।
इस खबर के सामने आते ही शहर के प्रबुद्ध वर्ग, श्रमिक संगठनों और व्यापारियों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि पहले ही कानपुर से कई बड़े संस्थान जा चुके हैं, ऐसे में श्रम विभाग का मुख्यालय भी हटना शहर की औद्योगिक साख को कमजोर करेगा। यह विभाग सीधे तौर पर मिलों, फैक्ट्रियों और लाखों श्रमिकों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसका स्थानांतरण बड़ा झटका माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार विभागों का लखनऊ में केंद्रीकरण होने से कानपुर का प्रशासनिक और आर्थिक महत्व घटता जा रहा है। इससे न केवल रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे, बल्कि शहर की ऐतिहासिक औद्योगिक पहचान पर भी असर पड़ेगा।
हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि की ओर से खुलकर विरोध सामने नहीं आया है। जबकि कानपुर से कई विधायक, सांसद और अन्य जनप्रतिनिधि होने के बावजूद उनकी चुप्पी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर के हित में सभी जनप्रतिनिधियों को एकजुट होकर इस प्रस्ताव का विरोध करना चाहिए।
यह मामला अब ‘संतुलित विकास’ बनाम ‘राजधानी केंद्रीकरण’ की बहस को भी हवा दे रहा है। लोगों का तर्क है कि यदि सभी प्रमुख कार्यालय राजधानी में ही केंद्रित कर दिए जाएंगे, तो अन्य बड़े शहरों का महत्व धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा।
हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन विभागीय स्तर पर चल रही हलचल से कर्मचारी और श्रमिक नेता सतर्क हो गए हैं। यदि यह निर्णय लागू होता है, तो इसे कानपुर की औद्योगिक स्थिति के लिए एक और बड़ा झटका माना जाएगा। अब नजर इस बात पर है कि शहर के जनप्रतिनिधि और जनता इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।
श्रमायुक्त कार्यालय शिफ्ट की तैयारी