ट्रैक किनारे मिला जला सिलेंडर: दहशत के बीच खुला सच, यात्री की लापरवाही निकली वजह

कानपुर। कानपुर सेंट्रल और चंदारी रेलखंड के बीच रेलवे ट्रैक किनारे संदिग्ध हालत में जला हुआ गैस सिलेंडर मिलने से बुधवार को रेल प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस में हड़कंप मच गया। पटरियों के पास ज्वलनशील वस्तु मिलने की सूचना को बेहद गंभीरता से लेते हुए रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। शुरुआती आशंका किसी बड़ी साजिश की जताई जा रही थी, लेकिन गहन पड़ताल के बाद जो सच सामने आया, उसने सभी को चौंका दिया। घटना 18 मार्च 2026 की है, जब रेलवे कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि खंभा संख्या KM 1017/14-16 के पास एक 5 किलोग्राम का गैस सिलेंडर जली हुई अवस्था में पड़ा है। सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन अलर्ट हो गया और सुरक्षा एजेंसियों को मौके पर रवाना किया गया। संवेदनशीलता को देखते हुए एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) टीम को भी जांच में शामिल किया गया, ताकि किसी भी तरह की विस्फोटक या आतंकी गतिविधि की संभावना को खारिज किया जा सके। मौके पर पहुंची टीमों ने जब बारीकी से जांच की तो राहत की बात सामने आई कि वहां किसी भी प्रकार का विस्फोटक पदार्थ या बारूद नहीं मिला। हालांकि, घटनास्थल पर मिला जला सिलेंडर अपने आप में एक बड़ा सवाल बना हुआ था। तलाशी के दौरान पुलिस को सिलेंडर के पास एक बैग, कुछ कपड़े, बर्तन, एक मोबाइल फोन और कुछ पहचान पत्र भी बरामद हुए, जिसने जांच को नई दिशा दी। बरामद मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने आरोपी की पहचान ओमप्रकाश मिश्रा (70 वर्ष) के रूप में की, जो मूल रूप से प्रतापगढ़ का निवासी है और वर्तमान में दिल्ली में रह रहा था। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस और आरपीएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 20 मार्च को दिल्ली से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने जो खुलासा किया, वह चौंकाने वाला था। उसने बताया कि वह ट्रेन से सफर कर रहा था और उस समय वह अत्यधिक नशे की हालत में था। इसी दौरान उसका गैस सिलेंडर, बैग और अन्य सामान ट्रेन से नीचे गिर गया। माना जा रहा है कि गिरने के दौरान किसी कारणवश सिलेंडर में आग लग गई, जिससे वह जली हुई अवस्था में ट्रैक किनारे पाया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने कुछ समय के लिए सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया था, क्योंकि रेलवे ट्रैक के पास किसी भी तरह का ज्वलनशील या संदिग्ध सामान मिलना गंभीर सुरक्षा खतरे का संकेत हो सकता है। हालांकि, समय रहते हुई जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामला स्पष्ट हो गया और किसी संभावित खतरे को टाल दिया गया। रेलवे अधिकारियों ने पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 153 (यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालना) और धारा 164 (खतरनाक सामान ले जाना) के तहत कानपुर सेंट्रल आरपीएफ पोस्ट पर मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा रहा है।
आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक एसएन पाटीदार ने बताया कि रेलवे ट्रैक के पास किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु मिलना अत्यंत गंभीर विषय है। इस तरह की घटनाएं यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती हैं, इसलिए रेलवे प्रशासन ऐसे मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाता है। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार का ज्वलनशील या प्रतिबंधित सामान साथ न रखें और नियमों का पालन करें।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि लापरवाही भी कभी-कभी बड़े खतरे का कारण बन सकती है। समय रहते जांच एजेंसियों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक संभावित बड़ी अफवाह या दहशत को शांत कर दिया गया, लेकिन यह मामला यात्रियों के लिए एक चेतावनी भी है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी भारी पड़ सकती है।

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