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कानपुर। औद्योगिक नगरी कानपुर के प्रसिद्ध श्री वैभव लक्ष्मी मंदिर में नवरात्रि के पावन अवसर पर इस वर्ष भी आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। शुक्रवार को माता के ‘चमत्कारी खजाने’ के वितरण के लिए मंदिर परिसर में भक्तों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। दूर-दराज से आए लाखों श्रद्धालु इस विशेष प्रसाद को पाने के लिए घंटों कतारों में खड़े रहे।
श्रद्धा और आस्था का यह आलम रहा कि शुक्रवार तड़के लगभग 4 बजे से ही मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। सुबह की दिव्य आरती और विशेष पूजन के बाद प्रातः 8 बजे से खजाना वितरण की प्रक्रिया शुरू हुई, जो लगातार शाम 5 बजे तक बिना रुके चलती रही। करीब 9 घंटे तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में भक्तों ने बारी-बारी से कतार में लगकर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, इस ‘खजाने’ को लेकर भक्तों में विशेष आस्था और विश्वास है। माना जाता है कि नवरात्रि के इस विशेष दिन माता लक्ष्मी स्वयं अपने भक्तों के लिए भंडार खोलती हैं और जो भी श्रद्धा से इस प्रसाद को प्राप्त करता है, उसके जीवन में सुख, समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है।
मंदिर के अध्यक्ष आनंद कपूर और उपाध्यक्ष करन रामानुज दास ने इस परंपरा के महत्व को बताते हुए कहा कि मंदिर में विराजमान माता की प्रतिमा ‘वरद मुद्रा’ में है, जिसके दोनों हाथ खुले होने का अर्थ है कि माता अपने भक्तों पर खुले हाथों से कृपा बरसाती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि माता ने स्वप्न में एक कन्या के रूप में दर्शन देकर यहां विराजमान होने का आदेश दिया था, जिसके बाद से यह परंपरा लगातार जारी है।
भक्तों का मानना है कि इस प्रसाद रूपी खजाने को घर में रखने से दरिद्रता दूर होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। कई श्रद्धालुओं के अनुसार, इस खजाने की कृपा से उनके जीवन में बड़े परिवर्तन आए हैं—किसी को रोजगार मिला, किसी के घर में खुशहाली आई और कई लोगों के सपने पूरे हुए।
भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा, वहीं स्वयंसेवकों ने भी व्यवस्था संभालने में सहयोग किया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उचित व्यवस्था की गई ताकि किसी को परेशानी का सामना न करना पड़े।
देर शाम तक मंदिर परिसर में माता के जयकारे गूंजते रहे और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु कतारों में लगकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते रहे, जिससे यह आयोजन आस्था, विश्वास और भक्ति का एक भव्य उदाहरण बन गया।