कानपुर। कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के कॉरिडोर-2 (सीएसए–बर्रा-8) के अंतर्गत एलिवेटेड सेक्शन का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में नौबस्ता स्थित कास्टिंग यार्ड में वायाडक्ट निर्माण में उपयोग होने वाले सभी पियर-कैप्स और डबल टी-गर्डर्स की ढलाई का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
करीब 4.50 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड सेक्शन के लिए कुल 106 पियर-कैप्स और 141 डबल टी-गर्डर्स की कास्टिंग की गई है। ये सभी संरचनाएं प्री-कास्ट तकनीक से तैयार की जाती हैं, जिन्हें पहले कास्टिंग यार्ड में बनाकर गुणवत्ता परीक्षण के बाद निर्माण स्थल पर क्रेन के माध्यम से स्थापित किया जाता है।
एलिवेटेड मेट्रो संरचना में पियर-कैप्स को पिलर्स के ऊपर लगाया जाता है, जिन पर यू-गर्डर और आई-गर्डर स्थापित किए जाते हैं। वहीं डबल टी-गर्डर्स का उपयोग एलिवेटेड स्टेशनों के स्टेशन बॉक्स को मजबूती प्रदान करने के लिए किया जाता है। इस आधुनिक तकनीक से निर्माण कार्य में गुणवत्ता के साथ-साथ गति भी बनी रहती है।
यूपीएमआरसी के इंजीनियरों की टीम ने नौबस्ता कास्टिंग यार्ड में इस महत्वपूर्ण चरण को पूरा कर लिया है। कॉरिडोर-2 की कुल लंबाई लगभग 8.60 किलोमीटर है, जिसमें से 4.50 किलोमीटर एलिवेटेड और करीब 4.10 किलोमीटर अंडरग्राउंड सेक्शन शामिल है। एलिवेटेड हिस्से में 5 और अंडरग्राउंड हिस्से में 3 स्टेशन प्रस्तावित हैं।
इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि कॉरिडोर-2 के एलिवेटेड सेक्शन का निर्माण तेजी से प्रगति पर है और पियर-कैप्स व डबल टी-गर्डर्स की कास्टिंग पूर्ण होना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने बताया कि जल्द ही यू-गर्डर्स और आई-गर्डर्स की ढलाई भी पूरी कर ली जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि देश में एलिवेटेड मेट्रो स्टेशनों के निर्माण में डबल टी-गर्डर्स का प्रयोग सबसे पहले कानपुर मेट्रो द्वारा किया गया है। यूपी मेट्रो के इंजीनियर शहरवासियों को समयबद्ध तरीके से मेट्रो सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।
गौरतलब है कि लगभग 24 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर-1 (आईआईटी से नौबस्ता) में से करीब 16 किलोमीटर रूट पर मेट्रो सेवाएं पहले से संचालित हैं, जबकि शेष सेक्शन और कॉरिडोर-2 पर तेजी से निर्माण कार्य जारी है।
मेट्रो कॉरिडोर-2 में पियर-कैप्स की ढलाई पूरी