कानपुर। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर औद्योगिक नगरी कानपुर भक्ति और आस्था के रंग में सराबोर नजर आ रही है। प्रतिवर्ष की परंपरा को निभाते हुए इस वर्ष भी प्रतिपदा तिथि पर माता श्री वैभव लक्ष्मी मंदिर में श्रद्धा और विश्वास की भव्य अखंड ज्योति प्रज्वलित की गई। मंदिर परिसर में 251 किलो घी की विशाल ज्योति स्थापित की गई है, जो पूरे नौ दिनों तक निरंतर प्रज्वलित रहकर भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी रहेगी।
नवरात्रि के प्रथम दिन मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही लंबी कतारों में खड़े भक्त “जय माता दी” के जयकारों के साथ माता के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते नजर आए। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के लिए इस बार की विशेष अखंड ज्योति प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि इस अखंड ज्योति में श्रद्धापूर्वक घी अर्पित करने से माता वैभव लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में भक्त इस अनुष्ठान में भाग लेते हैं और अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।
मंदिर की एक विशेष परंपरा के तहत इस पवित्र ज्योति को किसी एक कन्या के कर-कमलों द्वारा प्रज्वलित कराया जाता है। इसके लिए एक दिन पूर्व ही श्रद्धालु अपनी-अपनी कन्याओं के नाम मंदिर प्रशासन को भेजते हैं। प्राप्त नामों की पर्चियां माता के समक्ष रखी जाती हैं और पूरी पारदर्शिता के साथ एक पर्ची निकाली जाती है। इस वर्ष यह सौभाग्य तीन वर्षीय नन्हीं श्रेयांशी जैन को प्राप्त हुआ। विधि-विधान से उनका पूजन किया गया और उनके हाथों से अखंड ज्योति प्रज्वलित कराई गई। इस अवसर पर श्रेयांशी के माता-पिता भावुक नजर आए और इसे अपने परिवार के लिए अविस्मरणीय क्षण बताया।
मंदिर अध्यक्ष आनंद कपूर एवं उपाध्यक्ष करन रामानुज दास ने बताया कि यह अखंड ज्योति केवल प्रकाश का प्रतीक नहीं, बल्कि भक्तों की अटूट आस्था और विश्वास का प्रतीक है। उनका कहना है कि इस ज्योति की सेवा करने वाले भक्तों के जीवन से अंधकार दूर होता है और माता वैभव लक्ष्मी उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, जहां हर कोई माता के चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त कर रहा है।
वैभव लक्ष्मी मंदिर में जली अखंड ज्योति