कानपुर। अर्मापुर स्थित एसएफ ग्राउंड पर एडवांस वेपन एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) द्वारा प्रस्तावित भूमि पूजन कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया, जब क्षेत्रीय नागरिकों, खिलाड़ियों और तीनों आयुध निर्माणियों के यूनियन नेताओं ने इसका जोरदार विरोध कर दिया। बढ़ते विरोध और हंगामे के बीच अधिकारियों को कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा और आश्वासन देना पड़ा कि न्यायालय के अंतिम निर्णय तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि एसएफ ग्राउंड से जुड़ा मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में भूमि पूजन कर निर्माण कार्य की शुरुआत करना न्यायिक प्रक्रिया का सीधा उल्लंघन है। यूनियन नेताओं ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब विभाग की ओर से कोर्ट में पहले ही यह लिखित रूप में दिया जा चुका है कि वहां कोई निर्माण कार्य नहीं होगा, तो फिर भूमि पूजन का आयोजन किस आधार पर किया गया।
विरोध के दौरान ए.डब्ल्यू.ई.आई.एल. के सीजीएम (ओएफसी) आलोक कुमार सिंह और डीजीएम (एचआर) प्रवीण शुक्ला को प्रदर्शनकारियों के तीखे सवालों और नाराजगी का सामना करना पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाते हुए कार्यक्रम को तत्काल रद्द करने की मांग की।
स्थानीय नागरिकों और खिलाड़ियों ने स्पष्ट किया कि एसएफ ग्राउंड क्षेत्र का एक प्रमुख खेल मैदान है, जहां लंबे समय से खेलकूद और सामाजिक गतिविधियां आयोजित होती रही हैं। उनका कहना है कि इस मैदान पर किसी भी प्रकार का निर्माण न केवल खेल प्रतिभाओं को प्रभावित करेगा, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के लिए उपलब्ध एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल भी समाप्त हो जाएगा।
स्थिति बिगड़ती देख अधिकारियों ने समझदारी दिखाते हुए कार्यक्रम को स्थगित कर दिया और कहा कि न्यायालय के अंतिम फैसले के बाद ही आगे की कोई कार्रवाई की जाएगी। इस आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने विरोध समाप्त किया।
प्रदर्शन में छबि लाल यादव, पुष्पेंद्र जायसवाल, एस.के. सचान, निर्भय सिंह, राजीव सिंह, प्रेम नारायण, विनोद तिवारी, अरुण पांडे, संतोष यादव, आवेश कौशिक, रामचंद्र वर्मा, ओमवीर चौहान, राकेश यादव, प्रभु नाथ, बलवीर शंकर और अभिषेक सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और यूनियन प्रतिनिधि मौजूद रहे। यह मामला अब पूरी तरह न्यायालय के फैसले पर निर्भर हो गया है, जिस पर क्षेत्रीय लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
एसएफ ग्राउंड पर भूमि पूजन का विरोध, हंगामे के बाद निर्माण पर रोक