कानपुर। शहर के प्रमुख चिकित्सा संस्थान Regency Health ने हृदय रोगों, विशेषकर कार्डिएक अरेस्ट को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अस्पताल के विशेषज्ञों का कहना है कि कार्डिएक अरेस्ट एक गंभीर आपातकालीन स्थिति है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। हालांकि समय रहते इसके शुरुआती लक्षणों की पहचान और तुरंत चिकित्सा सहायता मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है।
कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर Dr. Abhineet Gupta ने बताया कि कार्डिएक अरेस्ट तब होता है जब हृदय अचानक धड़कना बंद कर देता है और व्यक्ति अचेत हो जाता है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर लोग यह मानते हैं कि कार्डिएक अरेस्ट बिना किसी चेतावनी के होता है, लेकिन कई बार शरीर पहले से कुछ संकेत देता है। बिना कारण सीने में तकलीफ, धड़कन का अनियमित होना, अचानक सांस फूलना और अत्यधिक थकान इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।
अस्पताल की हेल्थकेयर टीम के अनुसार लोग अक्सर हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा अंतर होता है। हार्ट अटैक उस स्थिति को कहते हैं जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है, जबकि कार्डिएक अरेस्ट हृदय की विद्युत प्रणाली में खराबी के कारण होता है, जिससे हृदय की धड़कन अचानक रुक जाती है।
डॉ. गुप्ता के मुताबिक कार्डिएक अरेस्ट की स्थिति में मरीज को बचाने के लिए तुरंत सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) और डिफिब्रिलेशन की आवश्यकता होती है। Regency Health में इस तरह की आपात स्थितियों से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और आधुनिक उपचार प्रोटोकॉल अपनाए जाते हैं, जिससे मरीजों को समय पर जीवनरक्षक उपचार मिल सके।
अस्पताल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे हृदय स्वास्थ्य को लेकर सजग रहें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि नियमित रूप से हृदय की जांच कराएं, संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें, तनाव को नियंत्रित रखें और धूम्रपान से दूरी बनाकर रखें।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उन्नत तकनीक और त्वरित चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से हृदय संबंधी आपात स्थितियों के जोखिम को कम किया जा सकता है। साथ ही लोगों में जागरूकता बढ़ाकर शहरवासियों को एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। ❤️🩹
कार्डिएक अरेस्ट के संकेतों को नजरअंदाज न करें