कानपुर। बाल श्रम उन्मूलन को लेकर जिला प्रशासन ने 12 से 25 मार्च तक विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके लिए जिलाधिकारी Jitendra Pratap Singh के निर्देश पर 10 टीमों का गठन किया गया है, जो विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर बाल श्रमिकों का चिन्हांकन करेंगी।
बुधवार को सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 की संशोधित नियमावली 2016 के तहत गठित जिला टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई। बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री द्वारा उत्तर प्रदेश को वर्ष 2027 तक बाल श्रमिकों से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके तहत कानपुर मंडल के लिए दिसंबर 2026 तक का लक्ष्य तय किया गया है।
सहायक श्रम आयुक्त राम लखन पटेल ने बताया कि बाल श्रम उन्मूलन के प्रभावी प्रवर्तन के लिए श्रम विभाग के साथ सभी उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और खंड विकास अधिकारियों को भी निरीक्षक नामित किया गया है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि अभियान के दौरान चिन्हित बाल एवं किशोर श्रमिकों की सूची शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनका शैक्षिक पुनर्वास कराया जा सके।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (नगर) राजेश कुमार, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उपजिलाधिकारी सदर अनुभव सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी सुरजीत सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। वहीं ट्रेड यूनियन की ओर से अनिल उपाध्याय और फीटा के अध्यक्ष उमंग अग्रवाल ने भी बाल श्रम उन्मूलन को सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए अपने सुझाव दिए।
बाल श्रम के खिलाफ 12 से 25 मार्च तक विशेष अभियान