संविधान समीक्षा बिल पर आंदोलन की चेतावनी

कानपुर। गैर राजनीतिक संगठन ‘ऑपरेशन विजय – बुराइयों के खिलाफ जंग’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और क्रांतिकारी अधिवक्ता Shivmangal Singh ने देशहित में तैयार किए गए “लोकतंत्र एवं संविधान समीक्षा बिल” को लेकर निर्णायक संघर्ष का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रस्तावित बिल पर संसद और विधानसभाओं में जनप्रतिनिधियों ने साथ नहीं दिया तो संगठन देशव्यापी आंदोलन करने को मजबूर होगा।
प्रेस को जारी बयान में शिवमंगल सिंह ने बताया कि संगठन द्वारा करीब 15 वर्षों के लंबे विचार-विमर्श, अध्ययन और देशभर के हजारों विद्वानों व सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा के बाद “लोकतंत्र एवं संविधान समीक्षा बिल” का मसौदा तैयार किया गया है। इस प्रस्तावित बिल में देश और समाज के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए 28 महत्वपूर्ण बदलाव और संशोधन शामिल किए गए हैं। उनका दावा है कि इस तरह का व्यापक और ऐतिहासिक प्रस्तावित बिल अब तक भारत में सामने नहीं आया है।
उन्होंने बताया कि इस बिल पर संसद में बहस कराने के उद्देश्य से देश के सभी सांसदों और विधायकों को पत्र भेजा गया है। पत्र में उनसे अनुरोध किया गया है कि वे इस प्रस्तावित बिल का अध्ययन करें और इसे संसद व विधानसभाओं में चर्चा के लिए आगे बढ़ाने में सहयोग दें। शिवमंगल सिंह के अनुसार यह बिल देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने के साथ-साथ आम नागरिकों के अधिकारों और सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
संगठन की ओर से भेजे गए पत्रों में प्रधानमंत्री, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय और राज्य मंत्रियों के साथ-साथ देश के सभी सांसदों और विधायकों को शामिल किया गया है। जानकारी के अनुसार देश के 403 लोकसभा सांसदों, 245 राज्यसभा सांसदों, 28 राज्यों की विधानसभाओं और तीन केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के लगभग 4100 से अधिक विधायकों तथा छह राज्यों की विधान परिषदों के करीब 500 से अधिक सदस्यों को इस संबंध में पत्र भेजा गया है।
पत्र के माध्यम से संसद और विधानसभाओं के महासचिवों व सचिवों से भी अनुरोध किया गया है कि वे इन पत्रों को संबंधित जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने में सहयोग करें, ताकि इस प्रस्तावित बिल पर व्यापक स्तर पर चर्चा हो सके। संगठन का मानना है कि लोकतंत्र को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बनाने के लिए समय-समय पर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की समीक्षा जरूरी होती है।
शिवमंगल सिंह ने कहा कि उनका संगठन पूरी तरह गैर राजनीतिक है और देश व समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ लंबे समय से संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जनता की भागीदारी और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि संसद और विधानसभाओं में इस प्रस्तावित बिल पर चर्चा कराने में जनप्रतिनिधियों का सहयोग नहीं मिला तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से देशव्यापी जनजागरण और आंदोलन चलाएगा। उनका कहना है कि संगठन का उद्देश्य किसी भी प्रकार का टकराव नहीं बल्कि देशहित में सकारात्मक बदलाव लाना है।इस संबंध में संगठन के मीडिया प्रभारी शिवम कुमार ने बताया कि आने वाले समय में इस मुद्दे को लेकर देशभर में जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा और लोगों को इस प्रस्तावित बिल के बारे में जानकारी दी जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग इसके समर्थन में आगे आएं। उन्होंने कहा कि संगठन का लक्ष्य है कि लोकतंत्र और संविधान से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक बहस हो और देश के भविष्य के लिए ठोस निर्णय सामने आए।

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