पेंशनर्स फोरम ने उठाई आवाज, 18 महीने के एरियर व पुरानी पेंशन बहाली की मांग

कानपुर। सेवानिवृत्त कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर पेंशनर्स फोरम ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। फोरम की 15 फरवरी 2026 को हुई महत्वपूर्ण बैठक में लिए गए निर्णय के अनुपालन में शनिवार को संगठन के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी कानपुर के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन मुख्य प्रशासनिक अधिकारी दलजीत सिंह ने प्राप्त किया।
ज्ञापन में सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़ी कई प्रमुख समस्याओं और मांगों को उठाया गया। फोरम ने विशेष रूप से यह मांग की कि प्रस्तावित आठवें वेतन आयोग के लाभों में पेंशनभोगियों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। फोरम के अनुसार इस विषय को लेकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिसे जल्द स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
इसके साथ ही कोरोना काल के दौरान रोके गए 18 महीने के महंगाई राहत (डीआर) के एरियर के भुगतान पर भी पुनर्विचार करने की अपील की गई। फोरम ने सुझाव दिया कि यदि केंद्र सरकार पर आर्थिक दबाव है तो इस एरियर का भुगतान दो या तीन किश्तों में किया जा सकता है, ताकि पेंशनभोगियों को राहत मिल सके।

ज्ञापन में अन्य महत्वपूर्ण मांगों में आयकर से पेंशनभोगियों को पूरी तरह मुक्त करने की बात कही गई। फोरम का कहना है कि सभी पेंशनभोगियों को आयकर के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए, जिससे बुजुर्गों को आर्थिक राहत मिल सके। वहीं ईपीएस-95 के तहत कोशियारी कमेटी की सिफारिशों को लागू करते हुए न्यूनतम 7500 रुपये मासिक पेंशन और उस पर महंगाई भत्ता सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।फोरम ने यह भी मांग उठाई कि अतिरिक्त पेंशन की व्यवस्था 65 वर्ष की आयु से ही लागू की जाए और इसके तहत पेंशन में क्रमशः 5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का आदेश जारी किया जाए। इसके अलावा देशभर में पुरानी पेंशन व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
ज्ञापन में वरिष्ठ नागरिकों को कोविड काल से पहले मिलने वाली रेलवे किराये की रियायत को फिर से शुरू करने की मांग भी शामिल है। साथ ही पेंशन राशिकरण (कम्यूटेशन) की कटौती अवधि को 15 वर्ष से घटाकर 12 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया। फोरम ने एक नई मांग रखते हुए कहा कि सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दो वर्ष में एक बार सहायक के साथ भारत भ्रमण की सुविधा भी प्रदान की जानी चाहिए, जिससे बुजुर्ग कर्मचारी देश के विभिन्न स्थलों का भ्रमण कर सकें।
फोरम के महामंत्री सर्वानंद अवस्थी और अध्यक्ष राजेश शुक्ला ने ज्ञापन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित अंतिम निर्णयों को सभी संबंधित कर्मचारियों पर समान रूप से लागू किया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान में समान मामलों में भी कर्मचारियों को अलग-अलग अदालतों में जाना पड़ता है, जिससे न्याय मिलने में देरी होती है और अदालतों पर भी अनावश्यक बोझ बढ़ता है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान बीएल गुलबिया, पीएस बाजपेई, सत्य नारायण, भानु प्रकाश निगम, आरपी शुक्ल, आरपीएस श्रीवास्तव, एचएन तिवारी, विनय प्रकाश उपाध्याय, शिव शंकर, उमेश शुक्ल, रविंद्र कुमार मधुर, आरपी वर्मा, मुमताज हुसैन और आनंद सिंह सहित दर्जनों पेंशनभोगी मौजूद रहे।

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