कानपुर। कानपुर के किदवई नगर में फर्जी मार्कशीट गिरोह मामले की जांच के दौरान पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच तीखा विवाद सामने आया। पूछताछ के लिए थाने लाए गए अधिवक्ता शमशाद अली को छुड़ाने को लेकर थाने में जमकर हंगामा हुआ और करीब एक घंटे तक पुलिस व वकीलों के बीच बहस चलती रही।
बताया गया कि फर्जी मार्कशीट कांड में एसआईटी द्वारा पूछताछ के लिए शमशाद अली को थाने बुलाया गया था। इसकी जानकारी मिलते ही उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के उपाध्यक्ष अनुराग पांडेय अपने साथी अधिवक्ताओं के साथ थाने पहुंच गए। जब इंस्पेक्टर धर्मेंद्र कुमार राम शमशाद अली को पूछताछ के लिए अंदर ले जाने लगे तो अधिवक्ताओं ने इसका विरोध किया। इसी दौरान अनुराग पांडेय और इंस्पेक्टर के बीच तीखी नोकझोंक भी हो गई।
करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने शमशाद अली को अनुराग पांडेय के सुपुर्द कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि 18 फरवरी को किदवई नगर थाना पुलिस ने 14 राज्यों के विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पूछताछ के दौरान कुछ कथित अधिवक्ताओं के नाम भी सामने आए थे, जिनमें शमशाद अली का नाम भी बताया जा रहा है।
इधर, इसी प्रकरण से जुड़े एक अन्य मामले में बाबूपुरवा थाना में अधिवक्ता शमशाद अली और उनके साथी राकेश अवस्थी के खिलाफ कूटरचित दस्तावेजों के जरिए 32 लाख रुपये हड़पने का मुकदमा दर्ज किया गया है। इंस्पेक्टर अरुण द्विवेदी के अनुसार विष्णुपुरी निवासी बृजेंद्र नाथ मिश्रा ने शिकायत दी है कि राकेश अवस्थी ने अजीतगंज स्थित भवन संख्या 130/307 व 130/307 (2) को अपनी जमीन बताकर पहले 6 लाख रुपये में एग्रीमेंट किया और बाद में 717 वर्ग गज जमीन 32 लाख रुपये में बेचने का सौदा कर लिया।
आरोप है कि बाद में अधिवक्ता शमशाद अली के माध्यम से वही जमीन किसी अन्य व्यक्ति को भी बेच दी गई, जबकि अभिलेखों में जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज है। पुलिस ने मामले में जालसाजी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फर्जी डिग्री कांड में थाने पर वकील-पुलिस आमने-सामने