कानपुर। Pranveer Singh Institute of Technology (PSIT) में बीसीए छात्र प्रखर सिंह की दर्दनाक मौत के बाद कॉलेज परिसर में उपजे भारी आक्रोश, लगातार विरोध प्रदर्शन और छात्र आंदोलन के दबाव में आखिरकार कॉलेज प्रबंधन को झुकना पड़ा। कई दिनों तक चले आंदोलन, नारेबाजी और धरना-प्रदर्शन के बाद प्रबंधन ने छात्रों और परिजनों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए लिखित रूप में आश्वासन जारी किया है। इस फैसले के बाद परिसर में तनाव धीरे-धीरे कम होने और शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रबंधन द्वारा जारी आश्वासन के अनुसार मृतक छात्र प्रखर सिंह के माता-पिता को उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही छात्र द्वारा कॉलेज में जमा की गई पूरी फीस वापस करने का भी निर्णय लिया गया है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यह फैसला मानवीय आधार पर लिया गया है और परिवार को हर संभव सहयोग दिया जाएगा। छात्र संगठनों ने इस निर्णय को आंदोलन की बड़ी जीत बताया है।
छात्रों की सबसे बड़ी नाराजगी अटेंडेंस को लेकर थी। लंबे समय से 75 प्रतिशत उपस्थिति के कड़े नियम को लेकर छात्र प्रबंधन पर दबाव बना रहे थे। अब प्रबंधन ने इसमें बड़ी ढील देने का ऐलान किया है। नए निर्णय के तहत सीटी (CT), पीयू (PU) और सेमेस्टर परीक्षाओं के दौरान 75 प्रतिशत अटेंडेंस के नियम में राहत दी जाएगी। इसके अलावा यदि कोई छात्र किसी एक लेक्चर में देरी से पहुंचता है तो अब पूरे दिन की जगह केवल उसी पीरियड की अनुपस्थिति दर्ज की जाएगी। इससे छात्रों को बड़ी राहत मिलने की बात कही जा रही है।
अटेंडेंस से जुड़ी पेनल्टी को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि अटेंडेंस से संबंधित सिक्योरिटी डिपॉजिट फिलहाल माफ किया जा रहा है। हालांकि यह नियम केवल उन छात्रों पर लागू होगा जिनकी उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम है। छात्रों का कहना है कि यह फैसला लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान करेगा।
घटना के समय सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवालों को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि लापरवाह सिक्योरिटी कर्मियों और संबंधित स्टाफ के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
कॉलेज परिसर में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर भी बड़ा निर्णय लिया गया है। प्रबंधन ने साफ किया है कि छात्रों के आने-जाने के समय किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं कराया जाएगा। यदि किसी कारणवश निर्माण कार्य जरूरी हुआ तो सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।
छात्रों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए गेट नंबर-7 को छोड़कर सभी गेट छात्रों के लिए खोल दिए गए हैं। इसके अलावा लाइब्रेरी को लेकर भी लंबे समय से चली आ रही असमानता को खत्म करते हुए छात्र और छात्राओं के लिए लाइब्रेरी की टाइमिंग समान कर दी गई है।
छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कॉलेज परिसर में एक मनोवैज्ञानिक काउंसलर की नियुक्ति करने का भी निर्णय लिया गया है। साथ ही यदि लेक्चर के दौरान किसी छात्र की तबीयत खराब होती है तो उसे तुरंत हॉस्टल जाकर आराम करने की अनुमति दी जाएगी।
कॉलेज प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस पूरे आंदोलन और विरोध प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक या अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। छात्रों के अनुसार यह आश्वासन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि आंदोलन के दौरान कार्रवाई की आशंका से कई छात्र डरे हुए थे।
गौरतलब है कि प्रखर सिंह की मौत के बाद कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक लापरवाही और सख्त नियमों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। छात्रों का आरोप था कि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, जिससे हालात बिगड़े। अब प्रबंधन द्वारा किए गए इन लिखित ऐलानों और वादों के बाद छात्र संगठनों ने आंदोलन स्थगित करने का संकेत दिया है। फिलहाल कॉलेज परिसर में शांति लौटने और हालात सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।