कानपुर — कानपुर में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों और नर्सिंग होम्स के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध अस्पतालों के विरुद्ध चल रही कार्रवाई किसी भी हालत में रोकी न जाए और यह अभियान लगातार जारी रहे। जिलाधिकारी ने कहा कि जिन अवैध नर्सिंग होम्स को प्रशासन द्वारा सील किया गया है, यदि वहां संचालक या किसी भी प्रकार के अराजक तत्व सील तोड़ने, नोटिस फाड़ने अथवा दोबारा अवैध गतिविधियां संचालित करने का प्रयास करते हैं, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यदि किसी सील किए गए नर्सिंग होम में किसी प्रकार की छेड़छाड़ होती है, तो उस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले संबंधित सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) या पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) के अधीक्षक की जिम्मेदारी तय की जाएगी। संबंधित अधीक्षक को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके क्षेत्र में सील किए गए किसी भी अवैध अस्पताल में कोई गतिविधि न हो। यदि इसके बावजूद कोई संचालक या अराजक तत्व सील तोड़ता है या प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन करता है, तो अधीक्षक को बिना किसी देरी के तत्काल एफआईआर दर्ज करानी होगी।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अवैध रूप से चल रहे अस्पताल न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि मरीजों की जान के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं। ऐसे में जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि जिले में केवल पंजीकृत और मानकों पर खरे उतरने वाले अस्पताल ही संचालित हों।
प्रशासन ने सीएमओ को निर्देशित किया है कि वे नियमित रूप से क्षेत्रीय निरीक्षण कराएं, अवैध अस्पतालों की पहचान करें और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही, आम लोगों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं अवैध अस्पताल या नर्सिंग होम संचालित होते दिखाई दें, तो इसकी सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन को दें।
जिला प्रशासन ने साफ किया है कि इस अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।