कुरान की तालीम पर अमल से ही दुनिया और आख़िरत में कामयाबी मुमकिन – हाफिज कासिम हबीबी
कानपुर। रमज़ान-उल-मुबारक के मुक़द्दस महीने में इबादत, सब्र और तक़वा का सिलसिला पूरे शबाब पर है। इसी कड़ी में शहर के बांस मंडी इलाके में स्थित डॉक्टर राजा के आवास पर आयोजित 6 दिवसीय तरावीह का दौर सोमवार की रात अकीदत, एहतराम और रूहानियत के माहौल में मुकम्मल हुआ। तरावीह की समाप्ति के बाद विशेष दुआ का आयोजन किया गया, जिसमें मुल्क की तरक्की, अमन-चैन, आपसी भाईचारे और खुशहाली के लिए बारगाह-ए-इलाही में हाथ उठाए गए।
ख़त्म-ए-तरावीह के इस मुक़द्दस मौके पर बड़ी संख्या में रोज़ेदार, उलेमा और शहर की गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं। पूरे माहौल में कुरान-ए-करीम की तिलावत, दुआओं और जिक्र-ए-इलाही की गूंज सुनाई देती रही, जिससे पूरा इलाका रूहानी नूर से सराबोर हो गया।
कुरान पूरी इंसानियत के लिए हिदायत का जरिया
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि (मेहमान-ए-ख़ुसूसी) तशरीफ लाए हाफिज कासिम हबीबी ने अकीदतमंदों को संबोधित करते हुए कहा कि कुरान शरीफ अजमत और हिदायत की वह किताब है, जो पूरी इंसानियत को सही रास्ता दिखाती है। उन्होंने कहा,
“जिसे दुनिया और आख़िरत में कामयाबी हासिल करनी हो, उसे कुरान-ए-करीम से अपना रिश्ता मज़बूत करना होगा और उसकी तालीम पर अमल करना होगा।”
उन्होंने रमज़ान की अहमियत बयान करते हुए कहा कि यह महीना तौबा, इस्तग़फार और अपने गुनाहों से सच्चे दिल से पलट आने का है। जानबूझकर रोज़ा छोड़ने वालों को उन्होंने सख़्त नसीहत देते हुए कहा कि ऐसा करना बड़ा गुनाह है और इससे बचना हर मुसलमान पर फर्ज़ है।
6 दिनों में कुरान मुकम्मल करने की सआदत
इस साल तरावीह के दौरान हाफिज इमरान साहब ने 6 दिनों में कुरान-ए-करीम मुकम्मल करने की सआदत हासिल की। मौजूद लोगों ने इसे अल्लाह का खास करम बताते हुए हाफिज इमरान को मुबारकबाद पेश की। तरावीह के हर दिन में अकीदतमंदों की संख्या बढ़ती रही और पूरे कार्यक्रम में अनुशासन व इबादत का विशेष ध्यान रखा गया।
पिछले कई वर्षों से जारी है इबादत का सिलसिला
कार्यक्रम के आयोजक डॉक्टर राजा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनके आवास पर पिछले कई वर्षों से लगातार तरावीह, रोज़ा इफ्तार और बक़रीद के मौके पर कुर्बानी का एहतिमाम किया जाता रहा है। उन्होंने भावुक स्वर में कहा,
“इन नेक कामों से हमें रूहानी सुकून मिलता है। हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह हमें हमेशा ऐसे ही नेक अमल करने की तौफीक अता फरमाए।”
रमज़ान का पैग़ाम: इबादत के साथ इंसानियत
उलेमाओं ने इस मौके पर कहा कि रमज़ान सिर्फ नमाज़ और रोज़े का नाम नहीं है, बल्कि हुक़ूक-उल-इबाद यानी बंदों के अधिकारों का ख्याल रखना भी इसका अहम हिस्सा है। पड़ोसियों, बीमारों, जरूरतमंदों और गरीबों की मदद करना ही रमज़ान का असली पैग़ाम है।
शहर की कई गणमान्य हस्तियों की रही मौजूदगी
ख़त्म-ए-तरावीह के इस रूहानी सफर में शहर की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल रहीं, जिनमें प्रमुख रूप से डॉक्टर राजा खान, डॉक्टर लईक खान, डॉक्टर वसीक खान, नेता मोइन खान, एहतेशाम अहमद, हमजा भाई, हाफिज रहीम साहब, उमैर बरकाती, मुस्ताक भाई, अलीम भाई, सैयद अजीम अशरफी, काजी समीउल्लाह, अलीम सर, काजी ओसाम, फरहान अत्तारी समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।
रूहानियत, भाईचारे और अमन-चैन के संदेश के साथ कानपुर में 6 रोज़ा तरावीह का यह मुक़द्दस आयोजन यादगार बनकर संपन्न हुआ।
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