:कानपुर—विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने केस्को प्रबंधन पर मुख्यमंत्री से हुए लिखित समझौते और रिफॉर्म एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। समिति के पदाधिकारियों ने बयान जारी कर कहा कि बिजली कर्मियों को पूर्व से मिल रही रियायती बिजली सुविधा समाप्त की जा रही है और निजीकरण/फ्रेंचाइजीकरण की तैयारी के तहत उनके आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इससे केस्को के बिजली कर्मियों में गहरा आक्रोश है।
संघर्ष समिति के आह्वान पर केस्को कर्मियों ने एकजुट होकर केस्को मुख्यालय पहुंचकर निदेशक तकनीकी और निदेशक वाणिज्य से मुलाकात की और स्मार्ट मीटर लगाए जाने का विरोध किया। समिति ने बताया कि 25 जनवरी 2000 को तत्कालीन मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्त के साथ हुए लिखित समझौते में रियायती बिजली सुविधा को पूर्ववत जारी रखने का स्पष्ट प्रावधान है। इसी आधार पर बनी ट्रांसफर स्कीम-2000 में भी कर्मचारियों की सुविधाएं बनाए रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
संघर्ष समिति का कहना है कि उत्तर प्रदेश पावर सेक्टर रिफॉर्म एक्ट तथा इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2003 की भावना के अनुसार विद्युत परिषद के विघटन के बाद कर्मचारियों की सेवा शर्तें और सुविधाएं किसी भी स्थिति में कम नहीं की जा सकतीं। ट्रांसफर स्कीम-2000 की धारा 12(बी)(2) में रियायती दर पर बिजली को सेवा शर्तों का हिस्सा माना गया है, जिसे समाप्त या घटाया नहीं जा सकता।
समिति ने आरोप लगाया कि केस्को में वर्टिकल व्यवस्था लागू कर विद्युत व्यवस्था को अव्यवस्थित किया जा रहा है और फ्रेंचाइजीकरण की तैयारी की जा रही है। निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कर्मचारियों के आवासों पर युद्धस्तर पर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 453 दिन पूरे होने पर कर्मियों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन भी जारी रखा।