कानपुर। हज़रत ख्वाजा सैय्यद दाता हसन सालार शाह (रह० अलै०) का 53वां सालाना उर्स मुबारक परंपरागत श्रद्धा, सद्भाव, भाईचारा और अमन के वातावरण में खानकाहे हुसैनी, कर्नलगंज ऊँची सड़क पर मनाया गया। उर्स के मौके पर हुज़ूर हज़रत मोहम्मद मुस्तफा (स०अ०व०) की सुन्नतों पर अमल करने, मुल्क से मोहब्बत रखने, इंसानियत को ज़िंदा रखने, सामाजिक बुराइयों को दूर करने और देश की खुशहाली के लिए कार्य करने का संकल्प लिया गया।53वें उर्स की शुरुआत 13 फरवरी को नमाज़-ए-ईशा के बाद जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के साथ हुई। इस अवसर पर उलेमा-ए-दीन ने पैग़म्बर-ए-इस्लाम की सुन्नतों पर चलने और आपसी भाईचारे को मज़बूत करने का पैगाम दिया। उर्स के दूसरे दिन 14 फरवरी को नमाज़-ए-मगरिब के बाद फ़ातिहा अव्वल हज़रत अली करम अल्लाहु वज्हू हुई, इसके पश्चात मजार पर इत्र, चंदन और गुलाब से गुलपोशी कर गागर-चादर पेश की गई। इसके बाद महफ़िल-ए-शमा (कव्वाली) का आयोजन हुआ, जिसमें सूफियाना कलाम से माहौल रूहानी हो उठा।
कुल शरीफ़ के दिन फज्र की नमाज़ के बाद कुरानख्वानी का एहतिमाम किया गया। सुबह 10 बजे कुल शरीफ़ की शुरुआत हुई, जहां शोरा-ए-कराम ने नात-ओ-मनकबत पेश की। “यूँ तो आपके जलवों से हर रात मुनव्वर थी, जिस रात आपको मेराज हुई उस रात का आलम क्या होगा” जैसी नातों पर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। उलेमा-ए-दीन ने हुज़ूर की शान और औलिया-ए-किराम की करामातों का ज़िक्र करते हुए मौजूद लोगों से मुल्क से मोहब्बत, दहशतगर्दी के खात्मे, हिन्दू-मुस्लिम एकता व भाईचारे के समर्थन और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने का संकल्प हाथ उठाकर दिलाया।
सलातो-सलाम के बाद सामूहिक दुआ हुई, जिसमें काज़ी-ए-शहर मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साकिब अदीब मिस्बाही ने अल्लाह से सरकार-ए-आला, पंजतन पाक, गरीब नवाज़ और हज़रत ख्वाजा सैय्यद दाता हसन सालार शाह के सदके में देश, प्रदेश और शहर में अमन-ओ-अमान, तरक्की व खुशहाली, फिलिस्तीन में शांति और दहशतगर्दों के खात्मे की दुआ मांगी। दुआ में शामिल अकीदतमंदों ने “आमीन” कहकर दुआ में शिरकत की। दुआ के बाद लंगर का आयोजन किया गया, जो देर शाम तक चलता रहा।
उर्स के मौके पर नगर के सम्मानित नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने भी शिरकत कर आपसी एकता और भाईचारे का संदेश दिया। कार्यक्रम में काज़ी-ए-शहर मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साकिब अदीब मिस्बाही, इखलाक अहमद डेविड चिश्ती, नायब शहर काज़ी कारी सगीर आलम हबीबी, अबुल हाशिम कश्फी, सूफी मोहम्मद हारुन निज़ामी सहित सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे। उर्स का समापन अमन, मोहब्बत और इंसानियत के पैगाम के साथ हुआ।