बिजली कर्मियों का प्रदर्शन

कानपुर— कानपुर में निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल के विरोध में बिजली कर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर केस्को में कार्यरत बिजली कर्मियों ने कार्य बंद कर व्यापक और संगठित आंदोलन किया। संघर्ष समिति ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त नहीं किया गया और निजीकरण के लिए टेंडर जारी किए गए, तो केस्को सहित पूरे प्रदेश के बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और इंजीनियर सामूहिक रूप से जेल भरो आंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संसद के आगामी बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को पारित करने का कोई भी प्रयास किया गया, तो इसका देशव्यापी और तीखा प्रतिरोध किया जाएगा और लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के तत्काल कार्य बंद कर ‘लाइटनिंग एक्शन’ पर चले जाएंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। यह आंदोलन पावर सेक्टर के निजीकरण के विरोध, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को वापस लेने, उत्तर प्रदेश में चल रही निजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह निरस्त करने और बिजली कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने जैसी अहम मांगों को लेकर किया गया। संघर्ष समिति ने बताया कि यह पहली बार है जब बिजली कर्मचारियों के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा और देश की दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई है, जिससे बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों, मजदूर संगठनों और किसानों की संयुक्त एकजुटता देखने को मिली और यह आंदोलन स्वतंत्र भारत के महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आंदोलनों में शामिल हो गया है। समिति ने चिंता जताई कि पावर सेक्टर में नियमित प्रकृति के कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग की जा रही है, जिससे कर्मचारियों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है और बिजली व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रमुख मांगों में आउटसोर्सिंग पर तत्काल रोक, नियमित पदों पर सीधी भर्ती, आउटसोर्स कर्मियों का नियमितीकरण, संविदा कर्मचारियों की बहाली और कर्मचारियों के उत्पीड़न पर पूर्ण विराम शामिल है। संघर्ष समिति का कहना है कि बिजली क्षेत्र का निजीकरण—चाहे वह वितरण हो, उत्पादन हो या टीबीसीबी के माध्यम से ट्रांसमिशन—गरीब उपभोक्ताओं, छोटे और मध्यम उद्योगों तथा आम जनता के हितों के विरुद्ध है, इसलिए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को तत्काल वापस लिया जाना अत्यंत आवश्यक है। केस्को में हुए इस शांतिपूर्ण और अनुशासित आंदोलन में बिजली कर्मियों के साथ केंद्रीय ट्रेड यूनियन, रेलवे, डिफेंस, बीमा, बैंक यूनियन और किसानों ने भी एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया। आंदोलन में पी एस बाजपेई, बी के अवस्थी, एच एन तिवारी, असित कुमार सिंह, रफीक अहमद, एस ए एम जैदी, आर पी कनौजिया, तारणि कुमार पासवान, आरिफ बेग, मो वसी, धर्मदेव, कपिल मुनि प्रकाश, आर एस मिश्रा, राजीव खरे, डॉ. राजेश सिंह, राणा प्रताप, मीनाक्षी सिंह, गौरव दीक्षित, आर पी श्रीवास्तव, ओ पी रावत, राम सावर सिंह, हशमत उल्ला खान, पवन तांबे, विनोद तिवारी, जी डी शर्मा, सिद्धनाथ तिवारी, उमेश शुक्ला, योगेश ठाकुर, राकेश कुमार, आशुतोष तिवारी, आदर्श सिंह सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। संघर्ष समिति ने कहा कि केस्को में हुआ यह आंदोलन यह स्पष्ट संदेश देता है कि बिजली कर्मी निजीकरण के खिलाफ और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था की रक्षा के लिए निर्णायक संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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