कुलदीप सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से झटका

नई दिल्ली/उन्नाव। उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सेंगर की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया, जिससे उन्हें फिलहाल जेल में ही रहना होगा। शीर्ष अदालत के इस रुख से स्पष्ट है कि गंभीर और संवेदनशील मामलों में त्वरित राहत देने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी।
कुलदीप सेंगर ने यह जमानत याचिका पीड़िता के पिता की कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) के मामले में दायर की थी। इस प्रकरण में दिल्ली की निचली अदालत ने सेंगर को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसी सजा के आधार पर उन्होंने सर्वोच्च अदालत से जमानत की गुहार लगाई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।
हालांकि जमानत पर सुनवाई से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले के शीघ्र निस्तारण पर विशेष जोर दिया। अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट को स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए हैं कि निचली अदालत के फैसले के खिलाफ लंबित अपील पर तीन माह के भीतर सुनवाई पूरी की जाए। कोर्ट ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता और जनहित को देखते हुए इसे अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।गौरतलब है कि यह मामला केवल सेंगर की अपील तक सीमित नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट में पीड़िता की ओर से भी एक अलग याचिका दायर की गई है, जिसमें निचली अदालत द्वारा दी गई 10 साल की सजा को अपर्याप्त बताते हुए सजा बढ़ाने की मांग की गई है। ऐसे में हाईकोर्ट के समक्ष अब दो परस्पर विरोधी याचिकाएं हैं—एक ओर सेंगर की सजा के खिलाफ अपील और दूसरी ओर पीड़िता की सजा बढ़ाने की मांग। हाईकोर्ट इन दोनों याचिकाओं पर एक साथ विचार करेगा।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में उन्नाव की एक युवती ने तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर दुष्कर्म के गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता के पिता को एक पुराने प्रकरण में जेल भेजा गया, जहां पुलिस हिरासत में उनके साथ कथित रूप से बेरहमी से मारपीट की गई। हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बाद में उनकी मौत हो गई। इस घटना ने देशभर में भारी आक्रोश और राजनीतिक हलचल पैदा की थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। विस्तृत जांच के बाद सीबीआई ने कुलदीप सेंगर को दोषी ठहराया, जिसके आधार पर अदालत ने उन्हें सजा सुनाई। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट पर टिकी हैं, जहां अगले तीन महीनों में इस बहुचर्चित मामले पर अहम फैसला आने की उम्मीद है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख यह संदेश देता है कि कानून के सामने कोई भी प्रभावशाली व्यक्ति विशेषाधिकार का दावा नहीं कर सकता, और गंभीर अपराधों में न्यायिक प्रक्रिया को पूरी गंभीरता से आगे बढ़ाया जाएगा।

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