26वें वार्षिकोत्सव के छठे दिन धार्मिक अनुष्ठानों और श्रीमद्भागवत कथा से भक्तिमय हुआ वातावरण
कानपुर।
गांधी नगर स्थित श्री शनि साई मंदिर, गणेश पार्क में चल रहे 26वें वार्षिकोत्सव के छठे दिवस रविवार को धार्मिक आस्था और वैदिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर 58 बटुकों का यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ भव्य रूप से संपन्न कराया गया। पूरे मंदिर परिसर में वेद मंत्रों की गूंज और धार्मिक अनुष्ठानों के कारण वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक एवं भक्तिमय बना रहा।
प्रातः काल से ही यज्ञ वेदी के चारों ओर बटुकों को विधिवत आसन ग्रहण कराया गया। वैदिक आचार्यों के निर्देशन में बटुकों ने यज्ञोपवीत धारण कर ब्रह्मचर्य, संयम, सदाचार और गुरु आज्ञा के पालन का संकल्प लिया। इस दौरान उपस्थित अभिभावकों की आंखों में अपने बच्चों को वैदिक संस्कारों से जुड़ते देख विशेष भावनाएं झलकती रहीं।
मुख्य आचार्य कृपा शंकर शुक्ला ने संस्कार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वैदिक धर्म में यज्ञोपवीत संस्कार को एकादश संस्कार कहा गया है। इस संस्कार के माध्यम से बालक के जीवन में धार्मिक, नैतिक और आध्यात्मिक अनुशासन की शुरुआत होती है। उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत धारण करने के साथ ही बटुक को गायत्री मंत्र की दीक्षा दी जाती है, जो जीवन भर उसके मार्गदर्शन का आधार बनती है।
संस्कार के उपरांत बटुकों द्वारा परंपरागत रूप से भिक्षा ग्रहण की गई, जिसे उन्होंने श्रद्धा भाव से गुरु को अर्पित किया। इसके पश्चात आचार्यों द्वारा बटुकों के कानों में गुरु मंत्र प्रदान किया गया, जिससे वे विधिवत वैदिक जीवन की ओर अग्रसर हुए। पूरे अनुष्ठान के दौरान शंखनाद, मंत्रोच्चार और हवन की आहुतियों से वातावरण अत्यंत पवित्र बना रहा।
संध्या काल में मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ, जिसमें कथा व्यास दीपक कृष्ण जी महाराज ने श्रद्धालुओं को महारास लीला, कंस वध एवं रुक्मणी विवाह की भावपूर्ण कथा सुनाकर भाव-विभोर कर दिया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला ग्रंथ है। भागवत की प्राप्ति के लिए श्रद्धा और विश्वास के साथ-साथ निश्चय, संयम और निरंतर परिश्रम भी आवश्यक है।
कथा के दौरान जैसे ही रासलीला और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य चरित्रों का वर्णन हुआ, श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए। भजनों और जयघोष से मंदिर परिसर गूंज उठा और श्रद्धालु देर तक कथा रसपान करते रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्यक्रम संयोजक महेंद्र नाथ शुक्ला, राजेंद्र नाथ शुक्ला एवं श्रीश शुक्ला की विशेष भूमिका रही। इसके साथ ही आचार्य गंगा शरण दीक्षित, आचार्य विनोद अग्निहोत्री, अमित तिवारी, अंकित मिश्रा, अंशु शुक्ला, राहुल दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, अभिभावक एवं धर्मानुरागी उपस्थित रहे। वार्षिकोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता कर रहे हैं। आयोजन समिति के अनुसार आगामी दिनों में भी भजन संध्या, हवन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा।
श्री शनि साई मंदिर में 58 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार, वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजा परिसर