कानपुर। पुलिस कमिश्नरेट कानपुर नगर द्वारा न्यायिक कार्यों को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए थाना पैरोकारों एवं कोर्ट मोहर्रिरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम रविवार को शताब्दी भवन, एचबीटीयू थाना क्षेत्र, नवाबगंज में संपन्न हुआ, जिसमें पुलिस कमिश्नरेट कानपुर नगर के सभी थानों से जुड़े पैरोकार एवं कोर्ट मोहर्रिर शामिल हुए।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य न्यायालयों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना, अभियोजन की गुणवत्ता बढ़ाना तथा मुकदमों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब को रोकना रहा। कार्यक्रम में प्रशिक्षण निदेशालय के अनुभवी प्रशिक्षकों एवं अभियोजन अधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर प्रतिभागियों को व्यावहारिक और सरल भाषा में महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आपराधिक न्याय प्रणाली में थाना पैरोकार एवं कोर्ट मोहर्रिर की भूमिका के महत्व से अवगत कराया गया। वक्ताओं ने बताया कि न्यायालयों की संरचना, विभिन्न स्तरों के न्यायालयों की कार्यप्रणाली तथा पुलिस और न्यायालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना मुकदमों की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस पर विशेष जोर दिया गया कि यदि पैरवी में थोड़ी सी भी लापरवाही होती है, तो उसका सीधा प्रभाव मुकदमे की प्रगति और परिणाम पर पड़ता है।
कार्यक्रम में थाना पैरोकारों एवं कोर्ट पैरोकारों के कर्तव्य और दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की गई। विवेचकों के साथ सतत और प्रभावी समन्वय बनाए रखने, न्यायालय से प्राप्त आदेशों की त्वरित सूचना संबंधित थानों तक पहुंचाने, अभियोजन साक्ष्यों, साक्षियों तथा माल मुकदमाती के समुचित और सुरक्षित प्रबंधन के तरीकों को विस्तारपूर्वक समझाया गया। प्रशिक्षकों ने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार समय पर कार्रवाई न होने से मजबूत मामलों में भी कमजोरी आ सकती है।
प्रशिक्षण सत्र में नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद थानों में रखे जाने वाले विभिन्न रजिस्टरों के प्रारूप में हुए बदलावों की भी जानकारी दी गई। इससे अभिलेखों का रख-रखाव अधिक सुस्पष्ट, अद्यतन और मानक के अनुरूप किया जा सकेगा। साथ ही यह भी बताया गया कि सही तरीके से रिकॉर्ड संधारण से न्यायालय में पुलिस की भूमिका और विश्वसनीयता मजबूत होती है।
इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को ICJS, CCTNS और ई-मालखाना जैसी आधुनिक तकनीकी प्रणालियों के प्रभावी उपयोग पर भी मार्गदर्शन दिया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के सही इस्तेमाल से न केवल कार्य में पारदर्शिता आती है, बल्कि समय और संसाधनों की भी बचत होती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी बनती है।
कार्यक्रम के अंत में पैरोकारों एवं कोर्ट मोहर्रिरों से अपेक्षाओं, Do’s & Don’ts, अनुशासन, समयबद्धता और आपसी समन्वय को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि न्यायिक पैरवी जितनी मजबूत होगी, उतना ही आपराधिक न्याय तंत्र सशक्त होगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में रमेन्द्र मिश्रा (संयुक्त निदेशक, अभियोजन निदेशालय), के.के. शुक्ला (संयुक्त निदेशक, प्रशिक्षण निदेशालय) तथा मनोज कुमार सिंह (एसीपी पनकी) ने प्रशिक्षण प्रदान किया। कार्यक्रम में दिनेश त्रिपाठी, पुलिस उपायुक्त मुख्यालय कानपुर नगर, शिखर, सहायक पुलिस आयुक्त कार्यालय कानपुर नगर सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। अंततः यह प्रशिक्षण न्यायिक पैरवी को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में मुकदमों के त्वरित एवं निष्पक्ष निस्तारण में सहायता मिलेगी।