2.66 करोड़ की जीएसटी चोरी उजागर

कानपुर। शहर में फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले एक संगठित और शातिर गिरोह का क्राइम ब्रांच ने बड़ा पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट सहित दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने जालसाजी और तकनीकी खामियों का सहारा लेकर सरकार को करीब 2.66 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान पहुंचाया।डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता कर पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण की शुरुआत रावतपुर निवासी रवि प्रकाश, जो अपूर्वा ट्रेडिंग कंपनी के मालिक हैं, की शिकायत से हुई थी। रवि प्रकाश ने जुलाई 2025 में कल्याणपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी फर्म के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर अज्ञात लोगों ने फर्जी कंपनियां खड़ी कर दी हैं।जांच में सामने आया कि अभियुक्तों ने रवि प्रकाश की फर्म से जुड़े दस्तावेजों और जीएसटी डाटा का गलत इस्तेमाल करते हुए कई बोगस कंपनियां तैयार कीं। इन फर्जी फर्मों के माध्यम से महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की कंपनियों के साथ मूंगफली की बड़ी खरीद-बिक्री कागजों पर दर्शाई गई। इसी फर्जी लेन-देन के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत लाभ उठाया गया और करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी की गई।मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। गहन जांच, दस्तावेजों के परीक्षण और तकनीकी विश्लेषण के बाद यह पुष्टि हुई कि कुल 2.66 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की गई है। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में एक पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट है, जिसने कानून और टैक्स प्रणाली की तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर पूरे फर्जीवाड़े का कागजी जाल बुना। दूसरा आरोपी कमल गौरव साहू है, जो एक व्यापारी है और इस अवैध कारोबार में सक्रिय रूप से शामिल था। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी पढ़े-लिखे और शातिर हैं, जिन्हें कानून की बारीक जानकारी थी, इसी कारण वे लंबे समय तक सिस्टम को चकमा देते रहे।डीसीपी क्राइम ने बताया कि इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड राकेश साहू है, जो फिलहाल फरार चल रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा। इस गिरोह का पर्दाफाश करने में सर्विलांस टीम और स्वाट टीम की भूमिका भी अहम रही। तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल डेटा, बैंक लेन-देन और डिजिटल ट्रेल के विश्लेषण के आधार पर अभियुक्तों की गतिविधियों का खुलासा किया गया।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जीएसटी चोरी जैसे आर्थिक अपराध सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं और ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। पकड़े गए अभियुक्तों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है, वहीं फरार आरोपी की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

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