पुस्तकालय संस्कृति को बढ़ावा देने पर डीएम ने दिया जोर

कानपुर।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में बीएनएसडी इंटर शिक्षा निकेतन में राजकीय जिला पुस्तकालय समिति की वर्ष 2026 की प्रथम बैठक सम्पन्न हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य जनमानस को सार्वजनिक पुस्तकालय सेवाओं से जोड़ना, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को अधिक से अधिक संख्या में पुस्तकालय का सदस्य बनाना तथा बच्चों और युवाओं को “स्क्रीन से पन्नों की ओर” आकर्षित करना रहा।
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से बच्चों की एकाग्रता, कल्पनाशीलता एवं अध्ययन की आदतें प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में पुस्तकालय संस्कृति को पुनः सशक्त करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि पुस्तकालय से 2 किलोमीटर की परिधि में संचालित सभी बोर्डों के विद्यालयों के विद्यार्थियों को माह में कम से कम एक बार राजकीय जिला पुस्तकालय का भ्रमण कराया जाए, जिससे बच्चों में पुस्तकों के प्रति रुचि विकसित हो सके।
जिलाधिकारी ने पुस्तकालय में महापुरुषों पर आधारित पुस्तक प्रदर्शनियों के आयोजन, पुस्तकालय परिसर में इंटरलॉकिंग कार्य, ऑनलाइन ई-कैटलॉगिंग, निष्प्रयोज्य सामग्री के निस्तारण, बुक इश्यू कल्चर को बढ़ावा देने तथा राजकीय जिला पुस्तकालय के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में प्रतिदिन आने वाले पाठकों की संख्या बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जाने चाहिए।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने राजकीय जिला पुस्तकालय के प्रभावी संचालन, पठन-संस्कृति के विकास और जनसहभागिता बढ़ाने के लिए अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए। जिलाधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा पढ़ने की आदतों के विकास के उद्देश्य से जिला पुस्तकालय समितियों के पुनर्गठन के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पुस्तकालयों को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जा सके।
उन्होंने जानकारी दी कि चुन्नीगंज स्थित राज्य पुस्तकालय में पुस्तकों का विशाल और समृद्ध संग्रह उपलब्ध है, जिसकी सदस्यता मात्र ₹500 की सुरक्षा धनराशि पर ली जा सकती है तथा अध्ययन हेतु कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं है। पुस्तकालय का नवीनीकरण सीएसआर के सहयोग से कराया गया है और पुस्तकों की ऑनलाइन उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है।
जिलाधिकारी ने “बुक-अ-मंथ” अवधारणा को प्रोत्साहित करते हुए विद्यालयों से अपील की कि वे विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के अतिरिक्त प्रतिमाह कम से कम एक पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित करें। भविष्य में श्रेष्ठ पाठकों को सम्मानित किए जाने की भी योजना प्रस्तावित है। साथ ही उन्होंने “बुके नहीं, बुक” अभियान की शुरुआत की जानकारी देते हुए शासकीय एवं सामाजिक कार्यक्रमों में पुष्पगुच्छ के स्थान पर पुस्तक भेंट किए जाने को बढ़ावा देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जनपद में पी.पी.एन. कॉलेज की लाइब्रेरी अत्यंत समृद्ध है और फूलबाग सहित अन्य सार्वजनिक पुस्तकालयों को भी सुदृढ़ किया जाएगा। सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों से सप्ताह में कम से कम एक लाइब्रेरी पीरियड अनिवार्य रूप से निर्धारित करने का अनुरोध किया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि “जीवन का सॉफ्टवेयर पुस्तकों से ही विकसित होता है” और अभिभावकों से भी बच्चों में पढ़ने की आदत डालने की अपील की।
उन्होंने यह भी बताया कि शासन की नीति के अनुसार सभी विद्यालयों में हिंदी एवं अंग्रेजी समाचार पत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों को समसामयिक घटनाओं की जानकारी मिल सके। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. संतोष कुमार राय, बेसिक शिक्षा अधिकारी सुरजीत कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार, डॉ. आर.सी. शर्मा, शांतनु श्रीवास्तव, अशोक मिश्रा, अखिलेश अवस्थी, डॉ. दिनेश कुमार सक्सेना, श्रीमती खुशबू पाण्डेय एवं श्री प्रशांत कुमार द्विवेदी (सह जिला विद्यालय निरीक्षक/प्रभारी पुस्तकालयाध्यक्ष एवं समिति सचिव) सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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