कानपुर। देश के रेल यात्रियों के लिए जल्द ही सफर की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। न यह ट्रेन वंदेभारत होगी और न ही राजधानी एक्सप्रेस, लेकिन रफ्तार के मामले में यह दोनों को पीछे छोड़ देगी। इस हाई-स्पीड ट्रेन में आप चाय-नाश्ता खत्म भी नहीं कर पाएंगे और दिल्ली से कानपुर पहुंच जाएंगे। केंद्र सरकार द्वारा घोषित नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के बाद उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में तेज़ रेल यात्रा का सपना साकार होने जा रहा है।
रेल मंत्री ने हालिया बजट में देशभर में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। इनमें सबसे अहम कॉरिडोर दिल्ली से वाराणसी तक का होगा, जो उत्तर भारत की यात्रा को ऐतिहासिक रूप से तेज़ बना देगा। इस कॉरिडोर के शुरू होने के बाद दिल्ली से वाराणसी का सफर चार घंटे से भी कम समय में पूरा हो सकेगा।
फिलहाल दिल्ली से वाराणसी के बीच चलने वाली सबसे तेज़ ट्रेन वंदेभारत एक्सप्रेस है, जिसे यह दूरी तय करने में करीब आठ घंटे का समय लगता है। लेकिन प्रस्तावित हाई-स्पीड ट्रेन इसी दूरी को महज 3 घंटे 50 मिनट में पूरा कर देगी। यानी दिल्ली से ट्रेन पकड़ते ही कैटरिंग स्टाफ द्वारा चाय-नाश्ता परोसने के दौरान ही यात्री कानपुर पहुंच जाएंगे। कुल यात्रा समय हवाई सफर से भी कम होने का दावा किया जा रहा है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, हाई-स्पीड ट्रेन के स्टॉपेज वंदेभारत की तुलना में कुछ अधिक हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए अलग ट्रैक तैयार किया जाएगा, जिससे रफ्तार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वर्तमान में वंदेभारत ट्रेन दिल्ली से चलकर कानपुर और प्रयागराज होते हुए वाराणसी पहुंचती है। नई हाई-स्पीड ट्रेन में इन स्टेशनों के अलावा अलीगढ़ को भी स्टॉपेज के रूप में शामिल किया जा सकता है, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के यात्रियों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
रेलवे के मुताबिक, दिल्ली से प्रयागराज तक का सफर हाई-स्पीड ट्रेन से केवल तीन घंटे में पूरा हो सकेगा, जबकि वंदेभारत को यही दूरी तय करने में करीब छह घंटे लगते हैं। यानी समय की बचत लगभग आधी हो जाएगी।
भविष्य में यह कॉरिडोर सिर्फ वाराणसी तक सीमित नहीं रहेगा। योजना के अनुसार, इसे आगे बढ़ाकर दिल्ली से सिलीगुड़ी तक बनाया जाएगा। करीब 1600 किलोमीटर लंबा यह रूट केवल 7 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली से वाराणसी की 865 किमी दूरी 3 घंटे 50 मिनट में और वाराणसी से सिलीगुड़ी की 720 किमी दूरी 2 घंटे 55 मिनट में तय की जाएगी।
इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी हाई-स्पीड कॉरिडोर प्रस्तावित हैं, जिनमें मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु जैसे रूट शामिल हैं। दक्षिण भारत में हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाला हाई-स्पीड त्रिकोण आईटी, विनिर्माण और व्यापारिक गतिविधियों को नई मजबूती देगा, जबकि उत्तर में दिल्ली–वाराणसी–सिलीगुड़ी कॉरिडोर पूर्वी भारत और उत्तर-पूर्वी राज्यों के विकास को नई रफ्तार देगा।
यात्रा समय में भारी कमी से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हाई-स्पीड रेल नेटवर्क भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकता है।
चाय हाथ में, कानपुर सामने! दिल्ली से उड़ान जैसी ट्रेन