छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में रचनात्मक लेखन कार्यशाला का शुभारंभ

कानपुर।
कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक की प्रेरणा से छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के इंस्टीट्यूट ऑफ़ फाइन आर्ट्स में दो दिवसीय “रचनात्मक लेखन कार्यशाला” का शुभारंभ विधिवत दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों और कलाकारों में लेखन की सृजनात्मक क्षमता को विकसित करना तथा कला और शब्दों के आपसी संबंध को सुदृढ़ करना है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि लेखनी विशेषज्ञा एवं प्रसिद्ध कवयित्री प्रोफेसर कमला पांडेय, पूर्व विभागाध्यक्ष, संस्कृत विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी रहीं। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कला में सौंदर्य का विशिष्ट स्वरूप दृष्टिगोचर होता है, उसी प्रकार शब्दों के सृजनात्मक संयोजन से उत्पन्न गीत, संगीत और कविताएं मानव मन को गहन सौंदर्य अनुभूति प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि रचनात्मक लेखन आत्म-अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है, जो संवेदनाओं को स्वर और आकार देता है।
कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रोफेसर सुधीर कुमार अवस्थी ने कहा कि संगीत, साहित्य और कला—ये तीनों मानव जीवन के अभिन्न अंग हैं। ये न केवल जीवन के सुख-दुःख, हर्ष-उल्लास और उत्सवों से जुड़े हैं, बल्कि मनुष्य को भीतर से समृद्ध भी करते हैं। जब लेखक शब्दों का चयन भावनाओं की गहराई के साथ करता है और लेखनी में उन्हें सशक्त रूप से पिरोता है, तो वही भाव पाठक और श्रोता के मन में भी सहज रूप से जागृत हो जाते हैं।
ललित कला संस्थान के निदेशक डॉ. मिठाई लाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि कलाकार अपनी सृजनात्मक कल्पनाओं को रेखा और रंगों के माध्यम से कैनवास पर तो सहजता से उतार देता है, किंतु उन्हीं भावों को शब्दों में अभिव्यक्त करना प्रायः कठिन होता है। यह कार्यशाला कलाकारों को अपनी कला की समीक्षा, सौंदर्यात्मक व्याख्या तथा लेखनी के माध्यम से प्रभावी अभिव्यक्ति का सशक्त मंच प्रदान करेगी।
कार्यशाला के संयोजक डॉ. मंतोष ने अपने वक्तव्य में कहा कि शब्दों से वाक्य बनते हैं और वाक्यों से लेखनी पूर्ण होती है, किंतु एक श्रेष्ठ लेखक अपने अनुभव, कल्पना और सृजनात्मक भावों के समन्वय से ऐसा लेखन करता है, जो पाठक और श्रोता—दोनों के हृदय में रसमय अनुभूति उत्पन्न करता है।
इस अवसर पर संगीत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजकुमार त्रिपाठी, ललित कला विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राज कुमार त्रिपाठी, डॉ. बप्पा माजी, विनय सिंह, जे. बी. यादव, तनीषा बधावन, डॉ. रणधीर सिंह, प्रिया मिश्रा, प्रियंशी, सतीश कुमार, मिलन सहित अनेक शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यशाला के पहले दिन साहित्य, कला और रचनात्मक लेखन के विविध आयामों पर गहन चर्चा की गई, वहीं आगामी सत्रों में व्यावहारिक लेखन अभ्यास और संवादात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

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