प्रहरी एप के दुरुपयोग का आरोप, पीडब्लूडी टेंडरों में धांधली का दावा

कानपुर।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) सहित विभिन्न निर्माण विभागों में कार्य करने वाले ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों पर प्रहरी एप के दुरुपयोग के माध्यम से गंभीर धांधली और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। कांट्रेक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इसे ठेकेदारों के उत्पीड़न और मनमाने तरीके से टेंडर आवंटन का माध्यम बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
कांट्रेक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अकील अहमद की ओर से पीडब्लूडी कानपुर जोन के मुख्य अभियंता को एक विस्तृत शिकायती पत्र भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि प्रहरी एप में कई गंभीर खामियां हैं, जिनका फायदा उठाकर कुछ अधिकारी खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। आरोप है कि आईडीएस सेल में बैठे मुख्य अभियंता (लखनऊ), अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता सहित अन्य अधिकारी अपने मोबाइल या डोंगल के माध्यम से टेंडर प्रक्रिया के दौरान ही यह देख लेते हैं कि किस ठेकेदार ने निविदा डाली है, कितनी निविदाएं आई हैं और उनकी मूल दरें क्या हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इसके बाद अधिकारी अपने चहेते ठेकेदारों से उनसे कम दरों पर टेंडर डलवाकर पसंदीदा फर्मों को ठेका आवंटित करवा देते हैं। यदि कोई ऐसा ठेकेदार, जो अधिकारियों से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं होता, लेकिन उसके टेंडर से अधिकारियों को लगता है कि उसे काम मिल सकता है, तो प्रहरी एप में मिली शक्तियों का दुरुपयोग कर पूरी निविदा प्रक्रिया को ही निरस्त करवा दिया जाता है।
इतना ही नहीं, आरोप है कि ऐसे ठेकेदारों पर दबाव बनाकर उन्हें दोबारा निविदा डालने से रोका जाता है। बाद में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, विशेषकर विधायकों के समक्ष उस ठेकेदार के खिलाफ फर्जी और मौखिक शिकायतें की जाती हैं तथा उसकी फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी भी दी जाती है। एसोसिएशन का दावा है कि पूरे प्रदेश में सैकड़ों ठेकेदार इस तरह की धांधली और उत्पीड़न का शिकार हो चुके हैं और हाल के दिनों में ऐसे कई मामलों के आरोप सामने भी आए हैं।
कांट्रेक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि प्रहरी एप में कुछ अधिकारियों को दिए गए विशेष अधिकार अब भ्रष्टाचार और उत्पीड़न का जरिया बन चुके हैं। संगठन ने डोंगल के माध्यम से दिए जा रहे इन अधिकारों, उनके दुरुपयोग और इससे जुड़े अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह शिकायती पत्र कानपुर जोन के मंडलायुक्त, जिलाधिकारी सहित लोक निर्माण विभाग के शीर्ष अधिकारियों को भी भेजा गया है।इनसेट —
“ऑफलाइन टेंडर बिकते हैं, बोलो खरीदोगे?”
कांट्रेक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने पीडब्लूडी के प्रमुख अभियंता को भेजे गए एक अन्य शिकायती पत्र में ऑफलाइन टेंडरिंग प्रक्रिया में भी बड़े पैमाने पर धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि कानपुर जोन के विभिन्न खंडों में लगातार ऑफलाइन टेंडर कराए जा रहे हैं, जहां पैसों के लेन-देन और आपसी सांठगांठ के जरिए विभागीय दरों पर ही निविदाएं डलवाई जाती हैं।
शिकायत में कहा गया है कि इन ऑफलाइन टेंडरों में कोई वास्तविक प्रतिस्पर्धा नहीं होती, जिससे बेहद कम और तयशुदा प्रक्रिया के तहत ठेके आवंटित कर दिए जाते हैं। इससे विभाग और सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। जबकि शासन स्तर से स्पष्ट और सख्त आदेश हैं कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर प्रकार की निविदाएं ई-टेंडरिंग के माध्यम से ही कराई जाएं।
एसोसिएशन ने मांग की है कि पिछले दो वर्षों में कराए गए सभी ऑफलाइन टेंडरों की जांच कराई जाए। साथ ही भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए 10 लाख रुपये से कम के टेंडरों को भी केवल ऑनलाइन माध्यम से कराने के सख्त निर्देश जारी किए जाएं, ताकि ठेकेदारों को समान अवसर मिल सके और सरकारी राजस्व की रक्षा हो सके।

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