क्रियाओं से भी पाप का आश्रव होता है – मुनि सुव्रतसागर महाराज

ललितपुर।
बुंदेलखंड के सुप्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पावागिरि में परम पूज्य आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज एवं नवाचार्य समयसागर महाराज के मंगलमय आशीर्वाद से आयोजित श्रीमज्जिजिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा विश्व शांति महायज्ञ एवं नव गजरथ महा महोत्सव अपने दिव्य वैभव और आध्यात्मिक गरिमा के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। महोत्सव के तीसरे दिन श्रद्धा, वैराग्य और संस्कारों का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
गुरुवार प्रातः वात्सल्य मूर्ति मुनि सुव्रतसागर महाराज के पावन सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैया मुरैना तथा सह-प्रतिष्ठाचार्य अमित जैन शास्त्री इंदौर के कुशल निर्देशन में मूलनायक भगवान चमत्कारी बाबा पारसनाथ स्वामी का भव्य मस्तिकाभिषेक संपन्न हुआ। अयोध्या नगरी में शांतिधारा, जन्म कल्याणक की पूजन-विधान के पश्चात बुंदेली संत मुनि सुव्रतसागर महाराज का 54वां अवतरण दिवस श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। मंगलाचरण ब्रह्मचारिणी निधि दीदी बीना ने किया। मुनि श्री का पाद पृच्छालन महिला मंडल बीना एवं अंशु राजमल जैन नरवर परिवार द्वारा किया गया, वहीं शास्त्र भेंट का सौभाग्य स्वाति-सचिन जैन भेल परिवार को प्राप्त हुआ।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि सुव्रतसागर महाराज ने गहन आध्यात्मिक संदेश देते हुए कहा कि “पाप केवल पाप कर्म करने से ही नहीं होता, बल्कि हमारी दैनिक क्रियाओं – चलने, बोलने, सोने, खाने और सोचने – से भी पाप का आश्रव होता है। इसलिए जीवन की प्रत्येक क्रिया में संयम और सावधानी आवश्यक है।” उन्होंने अभिमान त्यागने का संदेश देते हुए कहा कि लौकिक जीवन में हर व्यक्ति को एक-दूसरे की आवश्यकता होती है। माता-पिता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुनि श्री ने कहा कि पिता निमित्त बनते हैं और माता नौ माह तक पीड़ा सहकर संतान को जन्म देती है, इसलिए संसार में यदि कोई सबसे महान है तो वह माँ है। मानतुंगाचार्य महाराज के भक्तामर स्तोत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने माँ की महिमा का गुणगान किया और कहा कि माँ का आशीर्वाद लेकर किया गया कोई भी कार्य निश्चित रूप से सफल होता है।
दोपहर की बेला में तप कल्याणक के भव्य संस्कार संपन्न हुए। इस अवसर पर महाराजा नाभिराय का दरबार, आदिकुमार का राज्याभिषेक, राजतिलक एवं राजव्यवस्था का सजीव मंचन किया गया। 32 मुकुटबद्ध राजाओं द्वारा भेंट-समर्पण, ब्राह्मी-सुंदरी को अक्षर एवं अंक ज्ञान, असि, मसि, कृषि सहित षटकर्मों का उपदेश, नीलांजना नृत्य से वैराग्य की उत्पत्ति, लौकान्तिक देवों का आगमन एवं दीक्षा स्तवन, बारह भावना का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण तथा दीक्षा संस्कार विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इन दिव्य दृश्यों को देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े।
सायंकालीन धर्मसभा में मुनि श्री ने कहा कि “मोक्ष का द्वार केवल दिगंबरत्व और गुरु चरणों की शरण से ही खुलता है।” उन्होंने गृहस्थ जीवन के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि 19 तीर्थंकरों ने गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर वैराग्य प्राप्त किया, अतः गृहस्थ जीवन से डरने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उसे धर्ममय बनाना चाहिए।
सायं कालीन महाआरती का सौभाग्य श्रावकश्रेष्ठ देवेंद्र कुमार-प्रवीण जैन बंडा परिवार को प्राप्त हुआ। रात्रि में भरत–बाहुबली नाटिका का भव्य मंचन गोलालारिया दिगंबर जैन समाज ललितपुर द्वारा किया गया। साथ ही श्रद्धालुओं के लिए चाय-नाश्ता की समुचित व्यवस्था भी की गई।
कार्यक्रम में बाल ब्रह्मचारी अंशु भैया कोलारस, संजय भैया इंदौर, पारस भैया, पं. विनोद कुमार शास्त्री, राजकुमार चकरपुर, अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन बबीना, मंत्री जयकुमार जैन कंधारी, कोषाध्यक्ष उत्तमचंद जैन बबीना, उपाध्यक्ष विशाल जैन पवा, उपमंत्री आकाश चौधरी, ऑडिटर पंकज भंडारी सहित देश के कोने-कोने से पधारे सकल दिगंबर जैन समाज के गणमान्य जनों की सक्रिय सहभागिता रही।अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन बबीना ने जानकारी देते हुए बताया कि पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवें दिन 16 जनवरी को प्रातः मूलनायक भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा के पश्चात ज्ञान कल्याणक के संस्कार संपन्न होंगे। इस अवसर पर 400 से अधिक मुनिराजों की आहारचर्या एवं समवशरण की दिव्य रचना विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। कार्यक्रम के अंत में मंत्री जयकुमार जैन कंधारी एवं उपाध्यक्ष विशाल जैन पवा ने संयुक्त रूप से आभार व्यक्त किया।

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