कानपुर।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एलएलआर (हैलट) अस्पताल में दलालों की सक्रियता का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां हेपेटाइटिस-सी पॉजिटिव मरीज को पैथोलॉजी से जुड़े दलाल द्वारा फर्जी निगेटिव रिपोर्ट थमा दी गई। आधे घंटे में रिपोर्ट उपलब्ध होने पर परिजनों को संदेह हुआ, जिसके बाद जांच में दलालों के गिरोह का पर्दाफाश हुआ है।
हैलट अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों को आए दिन दलालों की परेशानी का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस प्रकरण में हद तब हो गई जब अस्पताल में भर्ती एक हेपेटाइटिस-सी पॉजिटिव रोगी की फर्जी एलाइजा निगेटिव रिपोर्ट तैयार कर दी गई। बताया गया कि एलाइजा जांच में सामान्यतः कम से कम तीन घंटे का समय लगता है, जबकि दलाल द्वारा ब्लड सैंपल लेने के महज आधे घंटे में रिपोर्ट लाकर दे दी गई।
यह मामला सर्जरी विभाग के एक प्रकरण की जांच के दौरान सामने आया। सर्जरी विभाग में भर्ती एक मरीज की ऑपरेशन से पूर्व नियमित जांच की गई थी। एक सप्ताह पहले रात में रैपिड कार्ड से की गई जांच में मरीज हेपेटाइटिस-सी पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद वायरल लोड एवं पुष्टि के लिए जूनियर डॉक्टर ने एलाइजा जांच कराने की सलाह दी।
इस बीच आरोप लगाया गया कि जूनियर डॉक्टर ने मरीज को बाहर से जांच कराने को कहा है। आरोप की गंभीरता को देखते हुए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने तत्काल जांच समिति गठित कर दी। मंगलवार को समिति की रिपोर्ट आने पर यह स्पष्ट हुआ कि जूनियर डॉक्टर ने कॉलेज के अंदर ही जांच कराने के निर्देश दिए थे, जबकि दलाल ने मरीज के परिजनों को बहला-फुसलाकर बाहर की फर्जी रिपोर्ट उपलब्ध करा दी।
मामले में मरीज के परिजनों ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की जांच टीम को लिखित बयान भी सौंपे हैं। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दलाल अस्पताल परिसर में सक्रिय रहकर मरीजों और तीमारदारों को गुमराह कर रहा था।
प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि सर्जरी से पहले प्रत्येक मरीज की हेल्प डेस्क/जनरल इमरजेंसी में हेपेटाइटिस बी, सी और एचआईवी की रैपिड कार्ड से जांच कराई जाती है। यदि रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो उसे दो से तीन बार दोहराकर पुष्टि की जाती है। अंतिम सत्यापन के लिए एलाइजा जांच कराई जाती है, जिसमें स्वाभाविक रूप से समय लगता है।
डॉ. काला ने तीमारदारों से अपील की कि वे किसी भी बाहरी व्यक्ति या दलाल के झांसे में न आएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल परिसर में बाहरी लोगों की आवाजाही पर सख्ती बरती जाए और दलालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यह मामला एक बार फिर अस्पतालों में सक्रिय दलालों पर सवाल खड़े करता है और यह दर्शाता है कि मरीजों की सुरक्षा एवं विश्वास बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी और जागरूकता कितनी आवश्यक है।
हेपेटाइटिस सी पॉजिटिव मरीज को दलाल ने थमाई फर्जी निगेटिव रिपोर्ट, परिजनों ने जांच टीम को दिए लिखित बयान