गंगा प्रदूषण पर नगर आयुक्त का सख्त एक्शन, बायोरेमेडिएशन केंद्रों की पोल खुली

कानपुर। गंगा नदी में दूषित जल के प्रवाह को लेकर समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों को गंभीरता से लेते हुए कानपुर नगर निगम के नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने मंगलवार को रानीघाट स्थित बायोरेमेडिएशन स्थल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कार्य प्रक्रिया तो क्रियाशील पाई गई, लेकिन आवश्यक अभिलेखों के अभाव और साफ-सफाई की खराब स्थिति पर नगर आयुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए मौके पर ही सख्त निर्देश जारी किए।
निरीक्षण के समय जोनल अभियंता-4 मीनाक्षी अग्रवाल, अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ राहुल अवस्थी तथा कार्यदाई संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अधिकारियों ने नगर आयुक्त को अवगत कराया कि वर्तमान में कुल 13 नालों का उपचार बायोरेमेडिएशन तकनीक के माध्यम से किया जा रहा है।
इनमें गंगा नदी में प्रवाहित होने वाले 07 नाले—रानीघाट, गोला घाट, रामेश्वर घाट, सत्तीचैरा घाट, डबका नाला, गुफ्तारघाट एवं परमिया नाला शामिल हैं। वहीं पांडु नदी में प्रवाहित होने वाले 06 नाले—गन्दा नाला, हलवाखाड़ा नाला, पनकी थर्मल नाला, अर्रा बिनगवाँ नाला, सागरपुरी नाला एवं पिपौरी नाला—का भी उपचार किया जा रहा है।
बायोरेमेडिएशन का कार्य डॉ. हेमंत गुप्ता की फर्म मेसर्स ऑर्गेनिक 121 साइंटिफिक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है। इस अवसर पर जोनल अभियंता मीनाक्षी अग्रवाल ने बताया कि बायोरेमेडिएशन एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें पर्यावरणीय परिस्थितियों को अनुकूल बनाकर सूक्ष्म जीवों की वृद्धि को प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे प्रदूषक तत्वों का विघटन होता है। उन्होंने बताया कि ट्रायल पीरियड के अंत तक बीओडी और सीओडी में 40 प्रतिशत कमी तथा ट्रायल के बाद 70 प्रतिशत तक कमी अनिवार्य है। गंगा में प्रवाहित जल के नमूने परीक्षण हेतु सीएसआईआर (CSIR) को भेजे गए हैं।
निरीक्षण के दौरान यह गंभीर लापरवाही सामने आई कि प्रत्येक बायोरेमेडिएशन स्थल पर अनिवार्य रूप से रखे जाने वाले रजिस्टर एवं रिकॉर्ड मौके पर उपलब्ध नहीं थे। इस पर नगर आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल निम्न निर्देश दिए—
दैनिक जल निकासी माप पुस्तिका: प्रत्येक स्थल पर नालियों से आने वाले जल की मात्रा का प्रतिदिन विवरण दर्ज किया जाए और संबंधित जोनल अभियंता द्वारा हस्ताक्षर सुनिश्चित किए जाएं।
एंजाइम रिकॉर्ड रजिस्टर: प्रतिदिन डाले जाने वाले एंजाइम, बैक्टीरिया एवं रसायनों की मात्रा का विवरण दर्ज किया जाए। साथ ही एंजाइम डालते समय जियोटैग फोटो अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किए जाएं।
टेस्टिंग विश्लेषण पुस्तिका: प्रत्येक नाले/स्थल पर जल परीक्षण से संबंधित अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं और उन पर संबंधित अभियंता के हस्ताक्षर अंकित हों।
इसके अतिरिक्त, रानीघाट बायोरेमेडिएशन स्थल के समीप भारी मात्रा में कूड़े के ढेर पाए जाने पर नगर आयुक्त ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मौके पर मौजूद सफाई नायक रज्जव अली को निर्देशित किया कि आज ही कूड़ा उठवाकर जियोटैग फोटो उपलब्ध कराए जाएं तथा भविष्य में स्थल पर प्रतिदिन उच्च स्तरीय साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।
नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि गंगा की स्वच्छता में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

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