मनीष गुप्ता
कानपुर।
हरजिंदर नगर स्थित गुरुद्वारा माता साहिब कौर में साहिब श्री गुरु गोविंद सिंह महाराज जी का पावन प्रकाश पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के वातावरण में भव्य रूप से मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारा परिसर गुरु महाराज की जयकारों, गुरुबाणी के मधुर कीर्तन और संगत की आस्था से सराबोर नजर आया। लाल बंगला, हरजिंदर नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगत ने गुरु घर में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रकाश पर्व की खुशियों में सहभागी बने।
प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में शब्द-कीर्तन के माध्यम से गुरु गोविंद सिंह महाराज जी के त्याग, बलिदान, शौर्य और मानवता के संदेशों का गुणगान किया गया। गुरुबाणी के पवित्र उच्चारण से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। इसके पश्चात अरदास की गई, जिसमें प्रदेश, नगर और समाज की सुख-समृद्धि, शांति और भाईचारे की कामना की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने गुरुद्वारा माता साहिब कौर पहुंचकर गुरु महाराज के चरणों में मत्था टेका और संगत को प्रकाश पर्व की बधाई दी। अपने संक्षिप्त संबोधन में उन्होंने कहा कि साहिब श्री गुरु गोविंद सिंह महाराज जी का जीवन साहस, त्याग, समानता और मानवता की अमूल्य सीख देता है। उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी ने अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी, जो आज के समाज के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक है।
इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के प्रधान सरदार कुलजीत सिंह ओबेरॉय, अध्यक्ष सरदार कुलबीर सिंह कोहली, इंद्रजीत सिंह कोहली, जनरल सेक्रेटरी गुरमीत सिंह, सरदार बलबीर सिंह छाबड़ा, रणजीत सिंह सहित अनेक पदाधिकारी एवं सेवादार उपस्थित रहे। सभी ने संगत के साथ मिलकर प्रकाश पर्व की व्यवस्थाओं को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में विभिन्न गुरुद्वारों की स्त्री संगत, गुरु हरराय एकेडमी के सदस्य तथा हजारों की संख्या में श्रद्धालु संगत ने सहभागिता की। महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर कीर्तन श्रवण और सेवा कार्यों में हिस्सा लिया, जिससे सामूहिक सहभागिता और एकता का सुंदर दृश्य देखने को मिला।
प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा साहिब में विशाल लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने सेवा भाव से लंगर छकाया। संगत द्वारा तन, मन और धन से की गई सेवा ने गुरु घर की मर्यादा और सिख परंपरा की महानता को दर्शाया। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, सेवा और समर्पण की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
समूचा गुरुद्वारा परिसर गुरु गोविंद सिंह महाराज जी की शिक्षाओं, कीर्तन और जयकारों से गूंजता रहा। प्रकाश पर्व का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे और मानवता के संदेश को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करता नजर आया।