मनीष गुप्ता
कानपुर।
गुरुवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सैकड़ों आशा कर्मियों ने जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट के सामने वाली सड़क पर धरने पर बैठी आशा कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की, जिससे कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। आशा कर्मियों का कहना है कि वर्षों से वे स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो उचित वेतन मिल रहा है और न ही स्थायी कर्मचारी का दर्जा। प्रदर्शन कर रहीं आशा कर्मियों ने मांग की कि उनका मासिक वेतन बढ़ाकर 15 से 20 हजार रुपये किया जाए। कई आशा वर्कर्स ने बताया कि उन्हें पिछले 6 से 7 महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने लंबित वेतन का तत्काल भुगतान किए जाने की भी मांग की। धरने की सूचना मिलने पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और आशा कर्मियों से बातचीत की। डीएम ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और मांगों को शासन स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। हालांकि आशा कर्मियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
आशा कर्मियों ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुरूप आशा वर्कर्स को राज्य स्वास्थ्य कर्मी का दर्जा दिया जाना शामिल है। इसके साथ ही न्यूनतम वेतन की गारंटी, मातृत्व अवकाश, ईएसआई, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और पेंशन की सुविधा देने की मांग की गई। उन्होंने 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख रुपये का जीवन बीमा दिए जाने की भी मांग उठाई।
आशा कर्मियों का कहना है कि उनसे धूप, बारिश और कड़ाके की ठंड में लगातार काम लिया जाता है, लेकिन उनके काम के घंटे तय नहीं हैं। उन्होंने काम के घंटे निर्धारित किए जाने की मांग भी रखी। साथ ही वर्ष 2017 से अब तक के सभी लंबित भुगतानों को तत्काल पूरा करने की मांग की गई।
प्रदर्शन कर रहीं आशा कर्मियों ने आरोप लगाया कि उन्हें टुकड़ों में भुगतान किया जाता है, वह भी पूरा नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि यदि मानदेय बढ़ाया जाए और समय पर भुगतान हो, तो वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाकर उन्हें आगे बढ़ा सकेंगी। आशा कर्मियों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन और तेज किया जाएगा।