निस्वार्थ सेवा और करुणा से ही बनता है सच्चा मनुष्य: एस. बी. के. भईया

मनीष गुप्ता

कानपुर। श्री राम वाटिका, नौबस्ता, कानपुर नगर में बृजेश क्षमा मिशन द्वारा आयोजित सत्संग में मुख्य प्रवक्ता व आध्यात्मिक शिक्षक एस. बी. के. भईया ने समाज को परोपकार, त्याग और सेवा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि जीवन का वास्तविक अर्थ जानना है तो दूसरों के लिए कष्ट सहन करना और त्याग करना ही धर्ममय जीवन का संकल्प है।उन्होंने रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, विनोबा भावे, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, लोकमान्य तिलक, गुरु नानक, कबीर और तुलसीदास जैसे महान आध्यात्मिक आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महापुरुषों के जीवन का केंद्र मानव सेवा रहा है।
एस. बी. के. भईया ने कहा, “मैं अपने लिए नहीं, अपनों के लिए हूं—और मेरे अपने वे हैं जो गरीब और वंचित हैं।” उन्होंने स्वामी विवेकानंद के बोधवाक्य का स्मरण कराते हुए कहा कि जिसका हृदय गरीबों के लिए रोता है, वही सच्चा महात्मा है।
स्वामी रामकृष्ण परमहंस के वचनामृत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शालिग्राम से भी मनुष्य बड़ा है, क्योंकि ईश्वर का आविर्भाव प्रतिमा में होता है तो भला मनुष्य में क्यों नहीं। ईश्वर से प्राप्त बुद्धि और बल का उपयोग सेवा में करना ही सच्ची साधना है।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक भावनाओं के उदय के बिना परोपकार की भावना विकसित नहीं होती और अच्छे संस्कारों के बिना अच्छे कर्म संभव नहीं हैं। परोपकार से बड़ा कोई उत्तम कर्म नहीं और दूसरों को कष्ट देना सबसे नीच कर्म है।एस. बी. के. भईया ने बताया कि किसी वास्तविक अभावग्रस्त व्यक्ति की निस्वार्थ भाव से सहायता करने पर जो संतुष्टि मिलती है, उससे जीवात्मा का विस्तार होता है और व्यक्ति जनकल्याण की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति सृष्टि की नियामक है और सभी प्रजातियों में मनुष्य सर्वोत्तम है, क्योंकि मानव शरीर प्राप्त कर जीव मोक्ष की ओर अग्रसर हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मानव शरीर के मुख्य द्वार—जिह्वा—पर राम नाम को धारण कर संसार-सागर से पार पाया जा सकता है, जैसा कि वेद और शास्त्र भी कहते हैं। सत्संग के दौरान उन्होंने कहा ज्यों-ज्यों रहेंगे आप शिव-शिव में, आएगी मन में शुद्धता और ज्यों-ज्यों बढ़ेगी शुद्धता, त्यों-त्यों जचेगी एकता। उन्होंने यह भी कहा कि ईश्वर को प्राप्त मनुष्य की पहचान यह है कि वह दूसरों के गिरे हुए को अपने हाथों से उठाने दौड़ पड़े—यही सच्चा प्रेम और करुणा है।कार्यक्रम में बृजेश तिवारी, पंकज तिवारी, हिमांशु ओमर, पंकज शुक्ला, दशरथ प्रसाद, राजेन्द्र चौहान, धर्मेन्द्र भदौरिया, संतोष, गीता सिंह, जया मिश्रा, अरविन्द्र अग्निहोत्री, सुधाकर पाण्डे, पूनम द्विवेदी, बलराम यादव, श्याम जी, शुभम, अनीता पाण्डे, सीमा शुक्ला, रानी शर्मा, प्रतिमा द्विवेदी, स्वाती, ज्योति सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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