कानपुर। शहर में पुलिस की लापरवाही का ऐसा दर्दनाक दृश्य सामने आया कि देखने वालों की आंखें भी भर आईं। बिहार के दरभंगा निवासी संतोष कुमार चौधरी अपने जवान बेटे की हत्या का न्याय पाने के लिए चार दिनों से कानपुर में थाने–थाने भटक रहे हैं, लेकिन अब तक FIR तक दर्ज नहीं की गई।
पीड़ित पिता के मुताबिक, 30 नवंबर की रात उनके बेटे भरत पर मोहल्ले के अंशु और उसके दो साथियों ने घर में घुसकर लाठी-डंडों से बेरहमी से हमला किया था। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाए गए भरत ने 1 दिसंबर की सुबह दम तोड़ दिया।
संतोष 4 दिसंबर को कानपुर पहुंचे और उसी दिन से रोज थाने के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि हर बार पुलिस उन्हें यही कहकर लौटा देती है—“जांच चल रही है, बाद में आएं।”
थाने में अधिकारियों के सामने फूट-फूटकर रोते हुए बुजुर्ग पिता बार-बार यही मांग करते रहे कि कम से कम उनके बेटे की हत्या की FIR तो दर्ज की जाए। उनकी अवस्था देखकर थाने में मौजूद लोग भी भावुक हो उठे, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
पीड़ित पिता का आरोप है कि हमलावर खुलेआम मोहल्ले में घूम रहे हैं और पुलिस सिर्फ कागजी औपचारिकताओं में ही उलझी है। वह लगातार अधिकारियों से मिलकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई सुनवाई नहीं मिली।
स्थानीय लोगों में भी नाराज़गी बढ़ रही है और वे सवाल उठा रहे हैं—
“एक पिता को अपने जवान बेटे की हत्या की FIR के लिए इतनी जिल्लत क्यों झेलनी पड़ रही है? आखिर कब होगी न्याय की शुरुआत?”