“कानपुर के कई क्षेत्रों में अवैध सट्टे का साम्राज्य, पुलिस मौन

मनीष गुप्ता
कानपुर। शहर के कई थाना क्षेत्रों में इस समय अवैध सट्टेबाजी का कारोबार चरम पर है। सुजातगंज, किदवई नगर, बाबूपुरवा,
बेगमपुरवा , कलक्टरगंज, परेड , बेकनगंज
फजलगंज, पांडु नगर और रेल लाइन किनारे बसे मोहल्लों में यह धंधा इतनी तेजी से फैल रहा है कि स्थानीय लोग इसे “खुलेआम अपराध का मेन मार्केट” कहने लगे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायतों और विरोध के बावजूद पुलिस लगातार मौन बनी हुई है, जबकि सटोरिए हर रोज लाखों का खेल बिना किसी डर के चला रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि कई क्षेत्रों में यह कारोबार पुलिस की जानकारी में ही चलता है और कुछ सटोरिये थाना व चौकी स्तर पर सेटिंग कर चुके हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि संभावित कार्रवाई की भनक लगते ही अड्डे तुरंत स्थान बदल लेते हैं—ऐसा तभी संभव है जब अंदर से किसी तरह की सूचना उन तक पहुँचती हो। रेल बाजार बाबू पुरवा
सुजातगंज में लाइन पार क्षेत्र, नौबस्ता ,मछरिया ,
गुरुद्वारा रोड, रेलवे लाइन किनारे और छोटे-छोटे ठेलों के पास शाम ढलते ही सट्टेबाजों की हलचल बढ़ जाती है। उधर किदवई नगर के पांडु नगर, न्यू कानपुर सिटी, जेड ब्लॉक और मार्केट एरिया में परची सिस्टम और मोबाइल दांव दोनों का भारी चलन है। सटोरिए युवाओं को पहले छोटे दांव में फँसाते हैं और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम की ओर खींचते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की गाड़ी कई बार उन्हीं जगहों से गुजरती है जहाँ रोजाना सट्टा चलता है, लेकिन कोई रोक-टोक नहीं होती। “अगर पुलिस को पता न हो तो अलग बात है, लेकिन यहाँ तो सबकुछ सामने हो रहा है और फिर भी शांति है… इसका मतलब साफ है कि कहीं न कहीं ऊपर तक सब सेट है,” एक सूत्र का कहना है।
कई दुकानदार बताते हैं कि सट्टे की वजह से क्षेत्रों में गलत तत्वों की आवाजाही बढ़ गई है। विरोध करने या शिकायत देने पर धमकी भी मिलती है। “माहौल ऐसा हो चुका है कि लोग घर से बाहर निकलते समय भी सोचते हैं कि कहीं कोई झगड़ा न हो जाए,” एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया। खुफिया सूत्रों के अनुसार, सट्टा नेटवर्क के पीछे 4–5 बड़े मास्टरमाइंड हैं, जो मोबाइल ऐप, व्हाट्सऐप नंबर, Google Pay/UPI और ऑफलाइन परची कटिंग से दांव चलवाते हैं। छोटे एजेंट हर मोहल्ले में फैले हुए हैं, जो रोजाना का हिसाब मुख्य संचालकों को सौंपते हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों का दावा है कि सट्टेबाजों पर लगातार कार्रवाई हो रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है। बड़े अड्डे जस के तस चल रहे हैं और कार्रवाई केवल छोटे परचियों तक सीमित है।
स्थानीय जनता की मांग है कि पूरे नेटवर्क पर एक संयुक्त छापेमारी अभियान चलाया जाए और उन पुलिस कर्मियों की भी जांच हो जो सटोरियों से सांठगांठ के आरोपों में घेरे में हैं। जब तक पुलिस की चुप्पी नहीं टूटेगी, तब तक कानपुर के कई क्षेत्रों में अवैध सट्टे का साम्राज्य यूँ ही बढ़ता रहेगा।

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