मनीष गुप्ता
पार्ट–3 — कार्रवाई की दस्तक या फिर एक और “रफा-दफा
कानपुर।
कानपुर में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े इस कथित अवैध वसूली कांड ने अब ऐसा मोड़ ले लिया है, जहां दबाव बढ़ता दिख रहा है और विभाग के अंदर खामोशी भी साफ झलकने लगी है। सूत्रों के अनुसार, पिछले 48 घंटों में कई नर्सिंग होम संचालकों, पैरामेडिकल स्टाफ और विभागीय कर्मियों ने अपने-अपने स्तर पर पूरे प्रकरण से जुड़े दस्तावेज, रिकॉर्डिंग और लेन-देन का संभावित ब्योरा इकट्ठा करना शुरू कर दिया है।इन आरोपों की तफ्तीश में सामने आया है कि प्राइवेट कर्मचारी पर वसूली, धमकी और दबाव के आरोप सिर्फ अस्पताल संचालकों तक सीमित नहीं हैं; कुछ कर्मचारियों का दावा है कि उसने विभागीय कमजोरियों का फायदा उठाकर “अनौपचारिक प्रभाव” तैयार कर लिया था। यही कारण है कि शिकायतें ऊपर तक पहुंचने से पहले ही दबा दी जाती थीं।सूत्र बताते हैं कि एक विस्तृत शिकायत-पत्र तैयार किया जा रहा है, जिसे डीएम कार्यालय में औपचारिक रूप से सौंपा जाएगा। इसमें बर्रा में स्थित मकान से जुड़े दस्तावेज, सरकारी बंगले पर कब्जे की स्थिति, निरीक्षण के दौरान हुई कथित अनियमितताओं और कथित ब्लैकमेलिंग के साक्ष्य शामिल हो सकते हैं।यह शिकायत सामूहिक रूप से दायर किए जाने की तैयारी में है ताकि किसी एक व्यक्ति पर प्रत्यक्ष दबाव न आए।सवाल अब यह है कि इतने गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद क्या विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराएंगे? या फिर पिछली कई घटनाओं की तरह यह मामला भी “अंदरूनी सैटलमेंट” और विभागीय औपचारिकताओं की परतों में दब जाएगा।फिलहाल शहर में चर्चा यही है कि अगर प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया, तो यह मामला पिछले कई वर्षों की वसूली व्यवस्था को उजागर कर सकता है। वहीं दूसरी तरफ, अगर जांच ठंडी पड़ गई तो विभाग में मौजूद कथित अवैध वसूली का नेटवर्क और भी मजबूत होने की आशंका जताई जा रही है।