कानपुर।
राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) विभाग में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। विभाग के एक सहायक आयुक्त (असिस्टेंट कमिश्नर) और एक ठेकेदार पर एक ट्रांसपोर्टर से रिश्वत मांगने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस पूरे प्रकरण की गहन जांच शुरू कर दी है, जबकि विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
ट्रक रोककर मांगी रिश्वत
जानकारी के अनुसार, ट्रांसपोर्टर वैभव सिंह ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके एक ट्रक को जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने बिना किसी ठोस कारण के रोक लिया था। ट्रक में लदे माल की जांच के बहाने उसे विभाग के कल्याणपुर स्थित कार्यालय में खड़ा करवा दिया गया। अधिकारियों ने यह कहते हुए ट्रक को सीज कर लिया कि उसमें पन्नी (प्लास्टिक शीट) अवैध रूप से लादी गई थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने जानबूझकर ट्रक में रखी पन्नी को ढक दिया, ताकि माल की सही स्थिति दिखाई न दे और बाद में इस बहाने से रिश्वत मांगी जा सके। वैभव सिंह के अनुसार, असिस्टेंट कमिश्नर ने ट्रक छोड़ने के एवज में कैलकुलेटर पर ₹1 लाख लिखकर मांग रखी।
ठेकेदार ने मांगे डेढ़ लाख रुपये
ट्रांसपोर्टर ने बताया कि इसके बाद विभाग से जुड़े ठेकेदार मन्नू नामक व्यक्ति 2 नवंबर को उनके कार्यालय पहुंचा और कहा कि “मामला निपटाने” के लिए ₹1.5 लाख देने होंगे। वैभव सिंह ने यह भी बताया कि मन्नू ने उन्हें डराया कि यदि पैसे नहीं दिए गए, तो ट्रक और माल दोनों को जप्त कर लिया जाएगा।
सीसीटीवी में कैद हुई पूरी घटना
शिकायतकर्ता ने बताया कि रिश्वत मांगने का पूरा घटनाक्रम उनके कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गया है। पुलिस ने इन फुटेज को सबूत के रूप में अपने कब्जे में ले लिया है। वैभव सिंह के अनुसार, यह वीडियो पूरे भ्रष्टाचार जाल का खुलासा करने के लिए पर्याप्त है।
केस दर्ज, जांच शुरू
शिकायत पर कल्याणपुर थाने में असिस्टेंट कमिश्नर और ठेकेदार मन्नू के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, जीएसटी विभाग ने भी अपनी ओर से विभागीय जांच प्रारंभ कर दी है। अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए एक टीम गठित की गई है, जो जल्द ही रिपोर्ट सौंपेगी।
भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई की तैयारी
यह मामला उस समय सामने आया है जब सरकार राजस्व विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लगातार सख्त रुख अपना रही है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि “यदि आरोप सही पाए गए, तो संबंधित अधिकारी और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यह मामला ऐसे भ्रष्ट नेटवर्क का उदाहरण है, जो सरकारी पदों का दुरुपयोग कर व्यापारियों को प्रताड़ित करता है। हालांकि, शिकायतकर्ता की तत्परता और ठोस सबूतों के चलते यह रिश्वतखोरी का जाल उजागर हो गया है