सम्पूर्ण समाधान दिवस पर संवेदनशील पहल: दो दिव्यांगों की जिंदगी में लौटी नई रोशनी

विधायिका सरोज कुरील और जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह की पहल से वर्षों से बाधित पेंशन पुनः शुरू, आधार सीडिंग की समस्या दूर हुई

कानपुर। प्रशासनिक संवेदनशीलता और मानवीय पहल का एक अनूठा उदाहरण सम्पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर तहसील घाटमपुर में देखने को मिला। यहां आयोजित दिव्यांगजन सशक्तिकरण शिविर न केवल सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रतीक बना, बल्कि यह साबित कर गया कि जब जनप्रतिनिधि और प्रशासन एक साथ संवेदना के साथ कार्य करें, तो किसी भी समस्या का समाधान संभव है।

शिविर में घाटमपुर की विधायक सरोज कुरील और जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह की संयुक्त पहल से दो गंभीर रूप से दिव्यांग व्यक्तियों की जिंदगी में नई उम्मीद की किरण जगी। दोनों ही लाभार्थियों — राजू पुत्र मणिराम, निवासी सिधौल और दिनेश चंद्र पुत्र रघुनंदन, निवासी बहरौली — के दोनों हाथ नहीं होने के कारण वे बैंक जाकर आधार सीडिंग नहीं करा पा रहे थे। तकनीकी कारणों से उनकी दिव्यांग पेंशन कई वर्षों से बाधित थी, जिससे उनका जीवन अत्यंत कठिनाई में बीत रहा था।

जैसे ही यह समस्या शिविर में विधायिका और डीएम के संज्ञान में आई, जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक की टीम को मौके पर बुलाया। टीम ने शिविर स्थल पर ही दोनों दिव्यांगों के आधार-सीडेड खाते खोल दिए। तत्पश्चात विधायिका सरोज कुरील और जिलाधिकारी ने दोनों लाभार्थियों को एटीएम कार्ड प्रदान किए तथा उनकी बाधित पेंशन को तुरंत पुनः आरंभ कराया।

यह त्वरित और संवेदनशील कदम देखकर शिविर में उपस्थित जनसमूह भावुक हो उठा। लोगों ने प्रशासन की इस मानवीय कार्यवाही की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पहल वास्तव में “संवेदनशील प्रशासन, सशक्त नागरिक” की अवधारणा को साकार करती है।

शिविर में दिव्यांगजन सशक्तिकरण के कई प्रयास
शिविर में कुल 78 दिव्यांगजनों का चिकित्सकीय परीक्षण किया गया, जिनमें से 52 को मौके पर दिव्यांग प्रमाणपत्र वितरित किए गए। वहीं 21 लाभार्थियों को विस्तृत परीक्षण हेतु रेफर किया गया और 5 आवेदन आवश्यक पात्रता न मिलने के कारण निरस्त किए गए।
इसके अलावा 8 दिव्यांगजन पेंशन पंजीकरण के लिए चिन्हित हुए, 11 लाभार्थियों को सहायक उपकरण (जैसे बैसाखी, श्रवण यंत्र, व्हीलचेयर आदि) वितरित किए गए और 2 दिव्यांगों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल के लिए पंजीकृत किया गया।

शिविर के दौरान अन्य नागरिक सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इस क्रम में 7 राशन कार्ड आवेदन, 3 आय प्रमाणपत्र आवेदन, तथा 3 एनपीसीआई लिंक खाते भी मौके पर खोले गए, जिससे लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ प्राप्त हो सके।

अनेक विभागों की सक्रिय भागीदारी
शिविर में डीसीपी दक्षिण, मुख्य चिकित्साधिकारी, उप जिलाधिकारी घाटमपुर, एसीपी घाटमपुर, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी और तहसीलदार घाटमपुर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में चिकित्सा, पूर्ति, समाज कल्याण, प्रोबेशन, श्रम और राजस्व विभागों की टीमों ने सक्रिय भूमिका निभाई। प्रत्येक विभाग ने अपने-अपने दायित्व के अनुसार मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया।

संवेदनशील प्रशासन की मिसाल
विधायिका सरोज कुरील ने कहा कि “दिव्यांगजन समाज की शक्ति हैं, और सरकार का कर्तव्य है कि उनके अधिकारों और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित की जाए। आज का शिविर इस दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है।”
वहीं जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि “सम्पूर्ण समाधान दिवस केवल शिकायत निवारण मंच नहीं, बल्कि जनता से जुड़ाव और संवेदना का प्रतीक है। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी सुविधा से वंचित न रहे।”

शिविर के समापन पर सभी लाभार्थियों ने प्रसन्नता और आभार व्यक्त किया। यह शिविर इस बात का साक्ष्य बन गया कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता एक साथ मिलती है, तो सरकारी तंत्र वास्तव में जनता के द्वार तक पहुँचता है।

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