छठ महापर्व की शुरुआत — भावना, उम्मीदों और खुशियों से जुड़ा आस्था का पर्व

कानपुर

दिवाली की रौनक के बाद अब सूर्य उपासना का चार दिवसीय छठ महापर्व आज से आरंभ हो गया है। भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष गहमरी ने कहा कि यह पर्व भारतीय संस्कृति, आस्था और पारिवारिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व नहाय-खाय से शुरू होकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूर्ण होता है।

गहमरी ने कहा कि छठ केवल बिहार और पूर्वांचल का नहीं, बल्कि पूरे देश और विदेशों में मनाया जाने वाला पर्व बन गया है। यह महापर्व भावना, उम्मीदों और खुशियों से जुड़ा है — जब परिवार एकत्र होकर रिश्तों को मजबूत बनाते हैं और सूर्य देव से संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य व सफलता की कामना करते हैं।

उन्होंने बताया कि अनादिकाल से सूर्योपासना भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है। सूर्य पुराण और भविष्य पुराण में इसके विस्तृत उल्लेख मिलते हैं।

चार दिन की पूजा विधि में
पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है। व्रती महिलाएं पूरे 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपील की कि छठ घाटों पर स्वच्छता, श्रद्धा और सामूहिक सौहार्द बनाए रखें ताकि यह पर्व हर वर्ष की तरह इस बार भी लोक आस्था और एकता का संदेश दे सके।

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